Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 23 मई। राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासत का पारा चढ़ने लगा है। आगामी 21 जून को रिक्त हो रही तीन सीटों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर पर्दे के पीछे रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
भाजपा खेमे में इस बार उम्मीदवार चयन केवल राजनीतिक गणित तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि सामाजिक, वैचारिक और संगठनात्मक संतुलन को भी प्रमुखता दी जा रही है। हाल ही हुई कोर कमेटी बैठक के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। इसके बाद संभावित दावेदारों की दिल्ली सक्रियता अचानक बढ़ गई है। संघ और संगठन के माध्यम से पैरवी का दौर भी तेज बताया जा रहा है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा इस बार हिन्दुत्व, राष्ट्रवाद और सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन के साथ ओबीसी, एमबीसी और मूल ओबीसी वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी वजह से कई ऐसे नाम भी चर्चा में हैं जो पिछला विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद संगठन में सक्रिय बने हुए हैं। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की दोबारा एंट्री की चर्चा है, जबकि सतीश पूनिया, राजेन्द्र राठौड़, नरसी कुलरिया, प्रकाश माली, अलका गुर्जर और प्रभुलाल सैनी भी संभावित नामों में शामिल बताए जा रहे हैं।
उधर कांग्रेस खेमे में फिलहाल खुली हलचल कम दिखाई दे रही है, लेकिन अंतिम फैसला पूरी तरह दिल्ली हाईकमान के हाथों में माना जा रहा है। मौजूदा सांसद नीरज डांगी दोबारा मौका पाने की कोशिश में हैं, वहीं पवन खेड़ा और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के नाम भी चर्चा में हैं। कांग्रेस के सामने बड़ा सवाल यह भी है कि पार्टी इस बार राजस्थान के स्थानीय चेहरे पर दांव लगाएगी या फिर बाहरी नेताओं को प्राथमिकता देगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा दो और कांग्रेस एक उम्मीदवार ही मैदान में उतारती है तो चुनाव निर्विरोध हो सकता है। लेकिन अतिरिक्त उम्मीदवार आने की स्थिति में जोड़तोड़, क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक मतदान की चर्चाएं अचानक तेज हो सकती हैं।
निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विधायकों को मतदान के दौरान केवल अधिकृत विशेष बैंगनी स्केच पेन का ही उपयोग करना होगा। अन्य किसी पेन से किया गया मतदान निरस्त माना जा सकता है।
राजस्थान की तीन सीटों का यह चुनाव केवल राज्यसभा सदस्य चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और शक्ति प्रदर्शन की नई परीक्षा भी माना जा रहा है।
