Written by : Sanjay kumar
कोटा, 23 मई। बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच थायरॉइड रोग अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कम उम्र में ही युवाओं और महिलाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते पहचान और सही उपचार के जरिए थायरॉइड रोगों को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
विश्व थायरॉइड दिवस के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. पार्थ जेठवानी ने बताया कि थायरॉइड ग्रंथि शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, हृदय की कार्यप्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान समय में थायरॉइड संबंधी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें महिलाएं और युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित दिखाई दे रहे हैं।
डॉ. जेठवानी के अनुसार मुख्य रूप से थायरॉइड की दो स्थितियां सामने आती हैं — हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड कम होना) और हाइपरथायरॉइडिज्म (थायरॉइड अधिक होना)। दोनों स्थितियों के लक्षण अलग-अलग होते हैं और समय पर पहचान न होने पर यह शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।
हाइपोथायरॉइडिज्म में अत्यधिक थकान, कमजोरी, वजन बढ़ना, ठंड अधिक लगना, बाल झड़ना, त्वचा का सूखना, याददाश्त कमजोर होना तथा महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। वहीं हाइपरथायरॉइडिज्म में तेजी से वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, बेचैनी, अधिक पसीना आना, हाथ कांपना और नींद संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं।
डॉ. जेठवानी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड की समस्या होने पर गर्भधारण में कठिनाई, गर्भपात का जोखिम, समय से पहले प्रसव और बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं बच्चों में थायरॉइड की समस्या उनके विकास, पढ़ाई, याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
यदि लंबे समय तक थायरॉइड का उपचार नहीं कराया जाए तो हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, हड्डियों की कमजोरी तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. जेठवानी ने बताया कि सामान्यतः हाइपोथायरॉइडिज्म के उपचार में T4 (लेवोथायरॉक्सिन) दवा दी जाती है, जबकि कुछ विशेष मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के आधार पर T3 थेरेपी या T4+T3 कॉम्बिनेशन थेरेपी भी उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है।
इस अवसर पर लोगों से अपील की गई कि वे थकान, वजन में असामान्य बदलाव, घबराहट या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और समय पर थायरॉइड जांच अवश्य करवाएं।
“जागरूकता, समय पर पहचान और सही उपचार ही स्वस्थ थायरॉइड और बेहतर जीवन की कुंजी है।”
