Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 27 जून। कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर राम मंदिर से जुड़े कथित नकदी एवं आभूषण चोरी प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में केवल इस्तीफों के माध्यम से कार्रवाई को सीमित किया गया तो इससे कई गंभीर सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे।
‘इस्तीफा पर्याप्त नहीं, जिम्मेदारी भी तय हो’
गुंजल ने अपने पत्र में कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तथा संस्थापक ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे से मामले का पटाक्षेप नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे के संचालन की जिम्मेदारी शीर्ष स्तर पर थी, इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
‘भगवाधारी मुख्यमंत्री से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा’
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह करते हुए कहा कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते उनसे निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा है। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या अपराध हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी पद पर रहे हों।
‘आस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता जरूरी’
गुंजल ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में उससे जुड़े किसी भी कथित वित्तीय अनियमितता या चोरी के मामले की निष्पक्ष जांच होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त करना उचित नहीं होगा, बल्कि पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए।
भाजपा पर लगाए राजनीतिक आरोप
प्रहलाद गुंजल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस मामले में बड़े लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे जनता का विश्वास प्रभावित होगा। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
