Written by : Sanjay kumar
कोटा, 27 जून। राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं और युवतियों को कथित रूप से जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने के मामले ने प्रदेशभर में सनसनी फैला दी है। विज्ञान नगर थाना पुलिस ने इस पूरे प्रकरण के मुख्य आरोपी मनीष शर्मा को गिरफ्तार कर उसके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। पुलिस की साइबर एवं फॉरेंसिक टीम अब डिलीट किए गए डिजिटल डेटा को रिकवर कर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई
इस मामले की शुरुआत 15 जून 2026 को हुई, जब बजरंग दल के कार्यकर्ता योगेश ने विज्ञान नगर थाने में सोशल मीडिया ग्रुप्स, चैट्स और स्क्रीनशॉट्स के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाओं और युवतियों को निशाना बनाकर एक संगठित डिजिटल नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी तथा मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया।
फर्जी पहचान से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी मनीष शर्मा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम, स्नैपचैट और डिस्कॉर्ड पर अपनी पहचान बदलकर “मोईन खान” नाम से सक्रिय था। आरोप है कि वह विभिन्न ग्रुप्स और चैनलों के माध्यम से महिलाओं से संपर्क करता था तथा डिजिटल माध्यम से उन्हें कथित रूप से ब्लैकमेल करने का नेटवर्क संचालित करता था। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी।
40 हजार से अधिक आपत्तिजनक फाइलों का दावा
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि आरोपी के मोबाइल और उससे जुड़े टेलीग्राम ग्रुप्स में 40 हजार से अधिक आपत्तिजनक एवं अश्लील वीडियो और फाइलें मौजूद थीं। पुलिस ने आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए हैं और साइबर विशेषज्ञ इनकी गहन जांच कर रहे हैं। वास्तविक संख्या और सामग्री की पुष्टि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
ग्रूमिंग और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर पहले महिलाओं और युवतियों से दोस्ती की जाती थी, फिर निजी फोटो और वीडियो हासिल कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे नेटवर्क में धर्म परिवर्तन और विदेशी कनेक्शन की आशंका भी जताई तथा केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की है।
पुलिस जांच में क्या हुआ पुष्टि, क्या नहीं
कोटा पुलिस की प्रारंभिक तकनीकी जांच में यह सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपत्तिजनक एवं अश्लील डिजिटल सामग्री के प्रसार से जुड़ा हुआ था। हालांकि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में जबरन धर्म परिवर्तन, खतना कराने, पाकिस्तान कनेक्शन या अन्य वायरल दावों के समर्थन में कोई ठोस एवं कानूनी रूप से प्रमाणित साक्ष्य नहीं मिले हैं। पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों से बचने की अपील भी की है।
डिलीटेड डेटा खोलेगा पूरे नेटवर्क का सच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी से पहले आरोपी ने अपने मोबाइल से कई टेलीग्राम ग्रुप, चैट हिस्ट्री और क्लाउड स्टोरेज का डेटा डिलीट कर दिया था। अब साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ अत्याधुनिक तकनीक की मदद से इस डिलीटेड डेटा को रिकवर करने का प्रयास कर रहे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही डेटा पूरे नेटवर्क, संभावित पीड़ितों की संख्या और अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका से पर्दा उठा सकता है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पूरा मामला साइबर फॉरेंसिक जांच के महत्वपूर्ण चरण में है। पुलिस का कहना है कि अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही वीडियो की वास्तविक संख्या, पीड़ितों की पहचान, डिजिटल नेटवर्क का वास्तविक स्वरूप तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। तब तक जांच जारी रहेगी और पुलिस हर पहलू की गहनता से पड़ताल कर रही है।
