अपने ही मंत्रालय से 99 लाख की सब्सिडी! केंद्रीय मंत्री पर क्यों मचा सियासी बवाल?

Written by : प्रमुख संवाद

जयपुर, 28 जून। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की पॉलीहाउस परियोजना के लिए 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। विपक्ष ने इसे हितों के टकराव का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि मंत्री ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उन्होंने एक किसान के रूप में नियमों के तहत योजना का लाभ लिया है।

यह मामला राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पेह गांव स्थित मंत्री के पॉलीहाउस प्रोजेक्ट से जुड़ा है। करीब 1.99 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड से 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत हुई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि भागीरथ चौधरी स्वयं नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं। ऐसे में उसी बोर्ड की योजना का लाभ लेना पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

विवाद बढ़ने पर भागीरथ चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है और न ही कोई तथ्य छिपाया है। उनके अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 में भी इस योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से उस समय सब्सिडी नहीं मिल सकी थी। उन्होंने कहा कि हजारों किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं और उन्होंने भी किसान होने के नाते आवेदन किया था।

मंत्री ने यह भी कहा कि उनके फार्म पर आधुनिक तकनीक से खेती की जाती है, जहां किसान, कृषि विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी प्रशिक्षण के लिए आते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पॉलीहाउस और कोल्ड स्टोरेज योजनाओं का प्रशासनिक प्रभार दूसरे कृषि राज्य मंत्री के पास है, इसलिए इस मामले में किसी प्रकार के प्रभाव का सवाल नहीं उठता।

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि आम किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लंबे समय तक दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं, जबकि सत्ता से जुड़े लोगों के काम तेजी से हो जाते हैं। वहीं गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि यदि मंत्री ने योजना का लाभ लिया है तो इससे किसी अन्य पात्र किसान का अवसर प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। एक ओर विपक्ष इसे नैतिकता और हितों के टकराव का मुद्दा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री का कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया कानून और नियमों के अनुरूप अपनाई है।

Pramukh Samvad

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