Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 28 जून।
कोटा शहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। लगभग 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक इमारत ‘झाला हाउस’ के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर फिलहाल रोक लग गई है। यह निर्णय इण्डियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एण्ड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) के कोटा चैप्टर द्वारा उठाई गई पहल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के त्वरित हस्तक्षेप के बाद संभव हुआ।
इंटेक कोटा चैप्टर के कन्वीनर निखिलेश सेठी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कैंप कार्यालय में मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन द्वारा झाला हाउस को जर्जर घोषित कर शीघ्र ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे तत्काल रोकने तथा भवन का वैज्ञानिक परीक्षण कराए जाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कोटा की विभिन्न हेरिटेज संस्थाएं भी इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मामले की गंभीरता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को झाला हाउस के संरक्षण के लिए सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। इसी दौरान कैंप कार्यालय में मौजूद कोटा नगर निगम आयुक्त ओ.पी. मेहरा से भी प्रतिनिधिमंडल की चर्चा हुई। लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशों का हवाला देते हुए नगर निगम आयुक्त ने झाला हाउस के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी गई, जिससे इतिहासकारों, विरासत विशेषज्ञों और शहरवासियों ने राहत व्यक्त की।
लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन में इंटेक ने कहा कि झाला हाउस केवल एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि कोटा के गौरवशाली इतिहास, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। संस्था ने आग्रह किया कि किसी भी ऐतिहासिक भवन की संरचनात्मक स्थिति कमजोर होने पर ध्वस्तीकरण को अंतिम विकल्प माना जाना चाहिए। उससे पहले आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से भवन का परीक्षण कर उसके संरक्षण, पुनरुद्धार और सुदृढ़ीकरण की संभावनाओं का आकलन किया जाना आवश्यक है।
इंटेक ने मांग की कि झाला हाउस का स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्थाओं से तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए तथा संबंधित तकनीकी रिपोर्ट एवं मास्टर प्लान सार्वजनिक कर पूरी निर्णय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। संस्था का मानना है कि इससे विरासत संरक्षण के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत होगा और भविष्य में ऐसे मामलों में संतुलित निर्णय लिए जा सकेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि लोकसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप से कोटा की इस अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रह सकेंगी। इंटेक ने नागरिकों, विरासत विशेषज्ञों और प्रशासन के बीच निरंतर संवाद बनाए रखते हुए जनहित और विरासत संरक्षण के अनुरूप निर्णय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
प्रतिनिधिमंडल में इंटेक के कन्वीनर निखिलेश सेठी, को-कन्वीनर बहादुर सिंह हाड़ा, हम लोग संस्था के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता, हाड़ौती हेरिटेज वॉक्स के सर्वेश हाड़ा, पर्यावरणविद ए.एच. ज़ैदी, सौरभ लोढ़ा, बृजेश विजयवर्गीय, अनिल शर्मा, डॉ. महेश पंजाबी, दिलदार कुरैशी, शैलेश जैन, पृथ्वीपाल सिंह सहित अनेक विरासत प्रेमी एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
