झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल में बड़ा हेल्थ इंश्योरेंस फर्जीवाड़ा: फाइलों में हुआ इलाज और जेब में गये 60 लाख!

Written by : Sanjay kumar

झालावाड़, 12 अगस्त। झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के नाम पर करीब 60 लाख रुपए के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

झालावाड़ जिले के सबसे बड़े सरकारी एसआरजी अस्पताल में स्वास्थ्य बीमा योजनाओं और इंश्योरेंस क्लेम को लेकर एक सनसनीखेज और बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। अस्पताल के भीतर बिना किसी मरीज के भर्ती हुए और बिना इलाज के केवल कागजों के सहारे बीमा कंपनियों से करीब 60 लाख रुपए का फर्जी क्लेम हड़पने का मामला सामने आया है। इस पूरे खेल ने स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक बीमा कंपनी ने क्लेम के लिए आए 82 मामलों के दस्तावेजों का मिलान अस्पताल के मूल मेडिकल रिकॉर्ड से करवाया। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। दस्तावेजों की गहन पड़ताल में पता चला कि जिन 82 मरीजों के नाम पर लाखों रुपए के क्लेम उठाए गए, उनमें से अधिकांश मरीज कभी अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए थे। मेडिसिन, सर्जरी और ऑर्थो विभाग से जुड़े इन मामलों में जब अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाले गए, तो मरीजों का कोई अता-पता नहीं मिला। जांच में केवल तीन-चार मामलों को छोड़कर शेष सभी आईपी, यानी इनपेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) टिकट और डिस्चार्ज समरी पूरी तरह फर्जी पाए गए।

फर्जीवाड़े का तरीका और आंतरिक मिलीभगत की आशंका
इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीके से दस्तावेजों को तैयार किया गया था। बीमा क्लेम पास कराने के लिए जिन मुख्य दस्तावेजों की आवश्यकता होती है—जैसे अस्पताल का असली पंजीयन नंबर, डॉक्टरों के प्रामाणिक नोट्स और उनकी आधिकारिक सील—वे सभी इन फर्जी टिकटों पर हूबहू पाए गए। अस्पताल के आधिकारिक दस्तावेजों की तर्ज पर इन पर्चियों और सीलों का इस्तेमाल यह साफ संकेत देता है कि इस सुनियोजित खेल में अस्पताल के भीतर के ही कुछ तत्वों या कर्मचारियों की गहरी संलिप्तता रही है।

तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और आगामी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एवं एसआरजी अस्पताल प्रशासन द्वारा एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट अस्पताल अधीक्षक को सौंप दी है।
जांच समिति के सदस्य डॉ. शकील अंसारी ने पुष्टि की है कि जांच के दौरान अधिकांश टिकट फर्जी पाए गए और अस्पताल के रिकॉर्ड रजिस्टर में इन नामों का कोई अस्तित्व नहीं मिला। वहीं, वरिष्ठ मेडिकल रिकॉर्ड ऑफिसर दिलीपसिंह खंगारोत ने बताया कि बीमा कंपनी से प्राप्त दस्तावेजों की सत्यता जब जांची गई तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।

अस्पताल प्रशासन अब इस गंभीर वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी को लेकर स्थानीय पुलिस थाने में औपचारिक मुकदमा दर्ज कराने की पूरी तैयारी कर रहा है। शुरुआती आकलन के अनुसार, इस फर्जीवाड़े से बीमा कंपनियों को लगभग 60 लाख रुपए का चूना लगाया गया है। इस खुलासे के बाद से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और मामले की गहराई से जांच जारी है ताकि इस रैकेट में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

Pramukh Samvad

ताजा खबरों को देखने के लिए प्रमुख संवाद से जुड़े

https://www.pramukhsamvad.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!