रथ यात्रा के साथ बदलेगी मथुराधीश प्रभु की सेवा प्रणाली, ग्रीष्मकालीन व्यवस्थाओं की होगी विदाई और वर्षा ऋतु के अनुरूप शुरू होंगे नए मनोरथ

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 14 जुलाई।
कोटा के ऐतिहासिक एवं सुप्रसिद्ध शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर, पाटनपोल में बुधवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ दिव्य रथ यात्रा मनोरथ का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर ठाकुर श्री मथुराधीश प्रभु अलंकृत दिव्य रथ पर विराजमान होकर निज तिबारी में भक्तों को दुर्लभ दर्शन देंगे। रथ यात्रा महोत्सव को लेकर मंदिर में विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है।

पुष्य नक्षत्र के शुभ संयोग में निकलेगी दिव्य रथ यात्रा
वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ के युवराज गोस्वामी मिलन कुमार बावा ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार आषाढ़ शुक्ला द्वितीया एवं तृतीया को पुष्य नक्षत्र के शुभ संयोग में दिव्य रथ यात्रा महोत्सव मनाया जाता है। महोत्सव की शुरुआत प्रभु के विशेष मंगला दर्शन और अभ्यंग सेवा से होगी। इसके बाद प्रातः 10 बजे से श्रद्धालु रथ पर विराजमान प्रभु के दिव्य दर्शन कर सकेंगे।

रथ यात्रा के साथ बदलेगी प्रभु की सेवा व्यवस्था
गोस्वामी मिलन कुमार बावा ने बताया कि रथ यात्रा मनोरथ के सम्पन्न होते ही प्रभु की दैनिक सेवा प्रणाली में ऋतु परिवर्तन के अनुरूप महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। अब तक ग्रीष्म ऋतु में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए की जा रही विशेष व्यवस्थाओं को विराम दिया जाएगा। मंदिर में जल का छिड़काव, फव्वारे, खस के पंखे, कुंजा तथा चंदन के शीतल परदे हटा दिए जाएंगे। साथ ही गर्भगृह और सिंहासन के समक्ष जल का उपयोग भी बंद कर दिया जाएगा, जो वर्षा ऋतु के आगमन का पारंपरिक संकेत माना जाता है।

शीतल भोग की जगह लगेंगे मौसमी फलों के विशेष भोग
रथ यात्रा के बाद प्रभु के राजभोग में भी परिवर्तन किया जाएगा। अब तक अर्पित किए जा रहे शीतल भोग जैसे दही-भात, पना आदि की जगह वर्षा ऋतु के अनुरूप आम, जामुन, अंकुरी, आमरस तथा आम और खोपरा (नारियल) से तैयार विशेष प्रसाद एवं भोग अर्पित किए जाएंगे। यह परिवर्तन पुष्टिमार्गीय परंपराओं के अनुसार ऋतु परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।

राग मल्हार से भक्तिमय होगा मंदिर का वातावरण
वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही मंदिर की अष्टयाम सेवा में भी बदलाव दिखाई देगा। प्रभु की सेवा में अब शास्त्रीय संगीत के अंतर्गत वर्षा ऋतु के विशेष राग मल्हार का गायन प्रारंभ होगा। राग मल्हार की मधुर स्वर लहरियां मंदिर परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर करेंगी और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराएंगी।

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