Written by : प्रमुख संवाद
दो महीने से डायलिसिस झेल रहीं महिलाओं का दर्द छलका, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन; बांसवाड़ा प्रसूता मौत मामले में चिकित्सा मंत्री के बयान से भी बढ़ी चर्चा
कोटा, 16 जुलाई।
कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से पीड़ित प्रसूताओं के मामले ने एक बार फिर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती पांच महिलाओं में से चार पहली बार मीडिया के सामने आईं और भावुक अपील करते हुए सरकार से या तो किडनी ट्रांसप्लांट कराने या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की मांग की। इस संबंध में महिलाओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी भेजा है।
दो महीने से डायलिसिस की पीड़ा, अब किया इलाज का विरोध
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे पिछले दो महीने से अधिक समय से अस्पताल में भर्ती हैं और हर दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस की पीड़ादायक प्रक्रिया से गुजर रही हैं। उनका आरोप है कि अब तक स्थायी उपचार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। दो दिन पहले परिजनों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था की मांग की थी और 48 घंटे का समय दिया था। समय सीमा पूरी होने के बाद महिलाओं ने विरोध स्वरूप बुधवार से डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया।
सिजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत
जानकारी के अनुसार, 4 से 8 मई के बीच ये सभी महिलाएं कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के लिए भर्ती हुई थीं। ऑपरेशन के बाद उनकी किडनियां प्रभावित हो गईं। वर्तमान में पांचों का इलाज सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (एसएसबी) में चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी किडनियां सामान्य रूप से काम नहीं कर रही हैं, इसलिए नियमित डायलिसिस आवश्यक है।
बांसवाड़ा मामले में मंत्री के बयान से भी बढ़ी चर्चा
इधर, बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत के मामले को लेकर भी चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच चिकित्सा मंत्री ने बयान देते हुए कहा कि सामने आए मामलों में केवल दो ही जांच योग्य हैं। मंत्री के इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।
इलाज, जवाबदेही और भरोसे पर उठे सवाल
कोटा मेडिकल कॉलेज की यह घटना प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रही है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जीवन बचाने के लिए तत्काल और प्रभावी उपचार की आवश्यकता है।
