Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 16 जुलाई। स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ, रानपुर तथा भारतीय मजदूर संघ ने स्टोन शिपर्स लिमिटेड प्रबंधन के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा कर करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस वार्ता कर श्रमिकों ने अपनी बात रखी। श्रमिक संगठनों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन ने श्रम कानूनों की अनदेखी करते हुए 49 कर्मचारियों की एकतरफा और अवैध रूप से छंटनी कर दी, जिससे दर्जनों परिवारों के सामने आजीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही कर्मचारियों को डराने-धमकाने, जातिगत रूप से अपमानित करने तथा उनके साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी तीन दिनों के भीतर इस पूरे मामले का न्यायपूर्ण समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।
एफआईआर के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने पर उठे सवाल
स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नाथूलाल गोस्वामी ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर कंपनी के बाहर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे कर्मचारियों को कथित रूप से डराया-धमकाया गया तथा जातिगत रूप से अपमानित और प्रताड़ित किया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में रानपुर थाना पुलिस ने कंपनी के दो प्रबंधकीय अधिकारियों गजानंद गौड़ और विष्णु दत्त शर्मा के विरुद्ध गंभीर धाराओं तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इसके बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित कर्मचारियों में गहरा आक्रोश, भय और निराशा व्याप्त है। उन्होंने कहा कि यदि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे पीड़ितों का कानून पर विश्वास कमजोर होता है।
रातों-रात चस्पा की गई छंटनी सूची, अगले दिन फैक्ट्री में प्रवेश तक नहीं मिला
नाथूलाल गोस्वामी ने बताया कि 30 जून की रात कंपनी प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना और श्रम नियमों की अवहेलना करते हुए फैक्ट्री गेट पर 49 कर्मचारियों की छंटनी की सूची चस्पा कर दी। अगले दिन जब कर्मचारी अपनी नियमित ड्यूटी पर पहुंचे तो उन्हें फैक्ट्री परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। तभी से सभी प्रभावित कर्मचारी फैक्ट्री गेट के बाहर टेंट लगाकर लगातार धरना दे रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
श्रम कानूनों और पूर्व समझौतों की अनदेखी का आरोप
भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री रवि गौतम ने कहा कि स्टोन शिपर्स प्रबंधन ने पूर्व में हुए द्विपक्षीय समझौतों और वार्ताओं की खुलेआम अनदेखी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थापित श्रम कानूनों, औद्योगिक संबंधों के नियमों तथा वरिष्ठता के सिद्धांतों की अवहेलना करते हुए कर्मचारियों की एकतरफा छंटनी की गई। उनके अनुसार यह फैसला गरीब श्रमिकों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार है और औद्योगिक शांति को भी प्रभावित करने वाला है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब श्रमिक प्रतिनिधिमंडल समस्या के समाधान के लिए प्रबंधन से मिलने पहुंचा तो अधिकारियों ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया, जातिगत टिप्पणियां कीं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
तीन दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन होगा और उग्र
भारतीय मजदूर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि संगठन हमेशा श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तीन दिनों के भीतर सकारात्मक पहल कर वार्ता शुरू नहीं की गई और कर्मचारियों को न्याय नहीं मिला, तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर आंदोलन को और अधिक व्यापक तथा प्रभावी बनाया जाएगा।
इस अवसर पर सीपी शर्मा, अवधेश मिश्रा, जिला मंत्री रवि गौतम, संदीप राजानी, राजस्थान विकास प्रकोष्ठ प्रभारी ब्रजेश कांत, महामंत्री राजेश पाराशर सहित भारतीय मजदूर संघ और कर्मचारी संघ के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें
कर्मचारी संघ ने मांग की है कि कंपनी द्वारा जारी एकतरफा छंटनी आदेश को तत्काल निरस्त कर सभी 49 कर्मचारियों को सम्मानपूर्वक पुनः सेवा में लिया जाए। कंपनी प्रबंधन, श्रमिक संघ और श्रम विभाग के बीच तत्काल औपचारिक वार्ता आयोजित कर गतिरोध समाप्त किया जाए। श्रम कानूनों तथा कर्मचारियों के सभी वैधानिक अधिकारों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। कर्मचारियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार, मानसिक एवं सामाजिक प्रताड़ना तथा मानहानि के लिए उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही पुलिस में दर्ज एफआईआर के आधार पर नामजद आरोपियों गजानंद गौड़ और विष्णु दत्त शर्मा के विरुद्ध निष्पक्ष, त्वरित एवं सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
