श्रमिक गोपाल भील की मौत पर भील समाज का प्रदर्शन, 50 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 17 जुलाई। नगर निगम के ठेका कार्य के दौरान सांड के हमले में सफाई श्रमिक गोपाल भील की मौत के मामले को लेकर शुक्रवार को भील समाज और सर्वसमाज के लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। करीब 500 से अधिक लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा घटना के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

पूर्व उप महापौर पवन मीणा के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन

पूर्व उप महापौर पवन मीणा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि गोपाल भील नगर निगम के ठेका कार्य के तहत सफाई कार्य कर रहे थे। इसी दौरान एक आक्रामक एवं अनियंत्रित सांड कार्यस्थल पर पहुंच गया और उसने गोपाल भील पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। ज्ञापन में इस घटना को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज ने भी दिया समर्थन

आंदोलन में विशेष आग्रह पर कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज भी शामिल हुए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग का समर्थन किया। इस दौरान प्रतापलाल मीणा (अध्यक्ष, आदिवासी जनजाति अधिकार मंच), पंचायत समिति सदस्य राजू भील (बूंदी), रामनाथ भील, धूलीचंद भील, पूर्व पार्षद सोनू भील, कर्मेन्द्र मीणा (जिला अध्यक्ष, एसटी प्रकोष्ठ, शहर जिला), छत्रभुज खींची (अध्यक्ष, डॉ. भीमराव अंबेडकर समिति), मंजू चौधरी, स्वर्गीय गोपाल भील के परिजन सहित कोटा शहर एवं आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।

दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में मांग की गई कि घटना के लिए जिम्मेदार नगर निगम के संबंधित अधिकारियों, सुपरवाइजर और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में लापरवाही या दायित्व सिद्ध होता है तो भारतीय न्याय संहिता की उपयुक्त धाराओं के तहत गैर इरादतन हत्या सहित आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए थे। साथ ही यह भी जांच कराने की मांग की गई कि आक्रामक सांड कार्यस्थल तक कैसे पहुंचा और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है। ज्ञापन में कहा गया कि घटना के एक माह बाद भी पीड़ित परिवार को पर्याप्त राहत और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

ठेका कर्मियों के लिए स्थायी सुरक्षा नीति बनाने की मांग

ज्ञापन में सरकार से मांग की गई कि ठेका, संविदा और आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारियों की दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में स्थायी नीति बनाई जाए, जिससे उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह मुआवजा, बीमा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सरकारी सुविधाएं मिल सकें।

मांगें नहीं मानी गईं तो होगा उग्र आंदोलन

मीडिया से बातचीत में पवन मीणा ने कहा कि यह संघर्ष केवल गोपाल भील के परिवार के लिए नहीं, बल्कि उन हजारों श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा के लिए है जो प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर सरकारी कार्य करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो भील समाज और सर्वसमाज के सहयोग से व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

Pramukh Samvad

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