Written by : Sanjay kumar
जींद, 17 जुलाई। देश के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और पारंपरिक डीजल इंजन या ओवरहेड बिजली के तारों के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित होगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसे भारतीय रेलवे का बड़ा कदम माना जा रहा है।
नई हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी। करीब 90 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर ट्रेन लगभग दो घंटे में सफर पूरा करेगी। 10 कोच वाली इस ट्रेन में प्रतिदिन लगभग 2,600 यात्रियों के यात्रा करने की क्षमता है।
सिर्फ 5 रुपये से शुरू होगा किराया
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद किफायती किराया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रा का न्यूनतम किराया मात्र 5 रुपये रखा गया है, जबकि अधिकतम किराया दूरी के अनुसार 25 रुपये तक होगा। यानी कम खर्च में यात्री आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन का सफर कर सकेंगे।
किन-किन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन
जींद से सोनीपत के बीच ट्रेन निम्नलिखित स्टेशनों और हॉल्ट पर ठहराव करेगी—
- जींद सिटी
- पांडु पिंडारा
- ललित खेड़ा हॉल्ट
- भम्भेवा
- ईसापुर खेड़ी हॉल्ट
- बुटाना हॉल्ट
- खंडराई हॉल्ट
- राब्रा हॉल्ट
- लाठ हॉल्ट
- मोहाना हॉल्ट
- बड़वासनी हॉल्ट
- सोनीपत न्यू
इसके अलावा आवश्यकता के अनुसार मध्यवर्ती प्रस्तावित ठहरावों पर भी ट्रेन का संचालन किया जाएगा।
ट्रेन का समय
रेलवे के अनुसार ट्रेन संख्या 74010 प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होगी और लगभग 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी।
वापसी में ट्रेन संख्या 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से चलेगी और लगभग दोपहर 1:00 बजे जींद पहुंचेगी।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन
हाइड्रोजन ट्रेन अत्याधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें इंजन की जगह फ्यूल सेल सिस्टम लगाया गया है, जो हाइड्रोजन गैस और हवा से प्राप्त ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा करता है।
यही बिजली ट्रेन की ट्रैक्शन मोटरों को चलाती है, जिससे पहिए घूमते हैं और ट्रेन आगे बढ़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में डीजल की तरह ईंधन नहीं जलता, इसलिए धुआं, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य प्रदूषक गैसें नहीं निकलतीं।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके उप-उत्पाद के रूप में केवल पानी की भाप और थोड़ी गर्मी निकलती है। यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित और स्वच्छ तकनीक माना जा रहा है।
ट्रेन की विशेष तकनीक
इस ट्रेन में कुल 10 कोच हैं, जिनमें दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ यात्री कोच शामिल हैं।
प्रत्येक पावर कार में—
- हाइड्रोजन फ्यूल सेल,
- लिथियम आयरन फॉस्फेट (LiFePO₄) बैटरी,
- हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर
लगाए गए हैं। ये सभी मिलकर ट्रेन को आवश्यक ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं और बैटरी अतिरिक्त ऊर्जा के भंडारण तथा आवश्यकता पड़ने पर बिजली उपलब्ध कराने का कार्य करती है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
भारतीय रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक भविष्य में डीजल इंजनों का बेहतर विकल्प बन सकती है। इससे प्रदूषण कम होगा, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ऐसी ट्रेनों का संचालन उन रेल मार्गों पर भी आसानी से किया जा सकेगा, जहां अभी तक ओवरहेड विद्युत लाइनें उपलब्ध नहीं हैं।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन देश में हरित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह परियोजना स्वदेशी तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक रेल प्रणाली की दिशा में भारतीय रेलवे के बढ़ते कदमों का प्रतीक है।
