कोटा की बेटी अरुंधति चौधरी ने रचा इतिहास: ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक भारत के नाम किया

Written by : Sanjay kumar

ग्लासगो/कोटा, 1 अगस्त 2026:
राजस्थान के कोटा की होनहार मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) 2026 में इतिहास रचते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया है।
महिला बॉक्सिंग के 70 किलोग्राम भार वर्ग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में अरुंधति ने इंग्लैंड की दिग्गज बॉक्सर चैंटेल रीड को मात देकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

गोल्डन सफर: क्वार्टर फाइनल से फाइनल तक

  • फाइनल: अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराकर भारत का परचम लहराया।
  • सेमीफाइनल: अरुंधति ने इंग्लैंड की मजबूत मुक्केबाज रोजी रसेल को 4-0 से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी।
  • क्वार्टर फाइनल: उन्होंने न्यूजीलैंड की मॉर्गन हेंडरसन को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल का सफर तय किया था।

परिवार में खुशी का माहौल और प्रार्थनाएँ

अरुंधति की इस जीत से पूरे देश और कोटा शहर में खुशी की लहर है। फाइनल मुकाबले से पूर्व उनके चाचा, बड़ी बहन और छोटे भाई सहित पूरे परिवार ने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की थी।
कोटा मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष एवं अरुंधति के पिता सुरेश चौधरी ने कहा, “हमें शुरू से विश्वास था कि अरुंधति स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगी।” वहीं उनकी माता सुनीता चौधरी ने बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर गहरा गर्व व्यक्त किया। उनके कोच अशोक गौतम ने भी उनकी इस उपलब्धि पर हर्ष जताया।

भारतीय सेना की वर्दी और बॉक्सिंग रिंग का सम्मान

वर्तमान में भारतीय सेना में कार्यरत अरुंधति चौधरी ने अपनी सफलता पर कहा कि उन्हें देश की सेवा करने के दो शानदार अवसर मिले हैं—पहला भारतीय सेना की वर्दी पहनकर मातृभूमि की रक्षा करना और दूसरा बॉक्सिंग रिंग में तिरंगा फहराना। दोनों ही जिम्मेदारियां उनके लिए अत्यधिक सम्मान और गर्व का विषय हैं।

युवाओं को प्रेरणादायक संदेश

अपनी इस उपलब्धि के बाद अरुंधति ने युवाओं से अपील करते हुए कहा:

“अपने सपनों को कभी मत मारिए। लक्ष्य पूरा करने का रास्ता थोड़ा कठिन हो सकता है और परिवार को मनाने में समय लग सकता है, लेकिन अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट है, तो पूरी मेहनत और ईमानदारी से आगे बढ़िए। आखिर जिंदगी आपकी है और फैसला भी आपका ही होना चाहिए।”

राजस्थान में खेल सुविधाओं के विस्तार पर जोर

अरुंधति ने बताया कि बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें अभ्यास के लिए राजस्थान छोड़कर हरियाणा के रोहतक जाना पड़ा था। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए, तो राज्य से और भी कई खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकेंगे।

Pramukh Samvad

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