राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव: 309 निकायों और 10,245 वार्डों के लिए आरक्षण लॉटरी की उल्टी गिनती शुरू, 12 से 14 अगस्त के बीच तय होंगे नए चुनावी समीकरण

Written by : Sanjay kumar

जयपुर: 9 अगस्त 2026
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ अब अपने निर्णायक दौर में पहुँच चुकी हैं। राज्यभर के नगरीय निकायों में वार्डों और निकाय प्रमुखों (महापौर, सभापति और अध्यक्ष) के पदों के आरक्षण निर्धारण के लिए लॉटरी प्रक्रिया अगले 4 से 5 दिनों (संभावित 12 से 14 अगस्त) में आयोजित की जाएगी। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग (LSG) और संबंधित सभी जिला कलेक्टरों के स्तर पर प्रशासनिक तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।

1. द्वस्तरीय पारदर्शी लॉटरी प्रणाली

  • निकाय प्रमुख (राज्य स्तर): प्रदेश के 309 निकायों के महापौर, नगर परिषद सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी राज्य स्तर पर स्वायत्त शासन विभाग (LSG) द्वारा निकाली जाएगी।
  • पार्षद पद (जिला स्तर): 10,245 वार्डों में पार्षदों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर्स की अध्यक्षता में संपन्न होगी।

2. निकायों एवं वार्डों का व्यापक ढाँचा

प्रदेश के 7 संभागों के अंतर्गत कुल 309 नगरीय निकायों और 10,245 वार्डों का पुनर्गठन व आरक्षण प्रस्तावित है:

निकाय की श्रेणीकुल संख्या
नगर निगम10
नगर परिषद47
द्वितीय श्रेणी नगरपालिका19
तृतीय श्रेणी नगरपालिका58
चतुर्थ श्रेणी नगरपालिका175
कुल नगरीय निकाय309
  • जयपुर संभाग सबसे बड़ा: चुनावी दृष्टिकोण से जयपुर संभाग प्रदेश में सबसे बड़ा है, जहाँ 91 निकाय और 2,970 वार्ड शामिल हैं।
  • कोटा एवं उदयपुर संभाग: इन दोनों संभागों में 28-28 निकाय शामिल हैं।

3. चुनावी समीकरण और दावेदारों की रणनीति

आरक्षण लॉटरी जारी होते ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियाँ और भावी प्रत्याशियों की हलचल तेज़ होना तय है:

  • वार्ड परिवर्तन का विकल्प: सामान्य या आरक्षित वर्ग के अनुसार जिन दावेदारों का अपना वार्ड प्रभावित होगा, वे अन्य सुरक्षित वार्डों से विकल्प तलाशेंगे।
  • राजनीतिक दलों की सक्रियता: आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही सत्ताधारी दल बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित सभी प्रमुख दल अपने उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देंगे।

4. अन्य महत्वपूर्ण संदर्भ

निकाय चुनावों की इन तैयारियों के साथ ही राज्य में अन्य प्रशासनिक व सामाजिक आकलन भी ध्यान में रखे जा रहे हैं। हाल ही में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट में भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकारी सेवाओं में जातियों के प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण विश्लेषण सामने आए हैं, जिसका असर भी आगामी स्थानीय निकायों की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।
निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए स्वायत्त शासन विभाग एवं समस्त जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हैं।
– मीडिया प्रकोष्ठ, स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान

Pramukh Samvad

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