Written by : प्रमुख संवाद
धन-संपत्ति नहीं, आत्मशांति ही जीवन की सच्ची कमाई : मुनि योगसागर जी महाराज
कोटा, 9 अगस्त। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में रविवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में वर्षायोग चातुर्मास कलश स्थापना महामहोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

“मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल गए हैं, गुरु योगसागर आए हैं…” जैसे भावपूर्ण भक्ति गीतों से पुण्योदय नसियां जी का विशाल परिसर गूंजता रहा। श्रद्धालु गुरु भक्ति में भावविभोर नजर आए, वहीं नन्हे-मुन्ने बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समारोह में विशेष रंग भर दिया। गुरु चरणों में समर्पण, धर्माराधना और आत्मकल्याण की भावना से बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं श्रद्धालु महामहोत्सव में शामिल हुए।
धन और वैभव नहीं, आत्मशांति की ओर बढ़ना जीवन का लक्ष्य
मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि चातुर्मास कलश स्थापना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह स्वयं के भीतर साधना, संयम, त्याग और आत्मशुद्धि का संकल्प लेने का अवसर है। धर्म के माध्यम से होने वाला पुण्यार्जन केवल बाहरी आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमारी भावना यह होनी चाहिए कि जिन संतों ने साधना के माध्यम से परम पद प्राप्त किया, हम भी उनके बताए मार्ग पर चलते हुए आत्मा के उस स्वरूप की ओर आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवनभर धन, संपत्ति और वैभव जुटाने में लगा रहता है, लेकिन केवल बाहरी संग्रह से मन की आकुलता और व्याकुलता समाप्त नहीं होती। वास्तविक सुख भीतर की शांति में है। संग्रह और परिग्रह बढ़ाने के बजाय उनसे विमुख होकर आत्मा की ओर लौटना ही सच्चे सुख और शांति का मार्ग है। तीर्थंकरों और चक्रवर्तियों ने भी अपार वैभव के बावजूद अंततः त्याग और आत्मसाधना का मार्ग अपनाया।
मुनिश्री ने कहा कि धर्म, गुरु और सत्संग का अवसर मिलना पूर्व पुण्यों का परिणाम है। इसलिए इस दुर्लभ अवसर का उपयोग केवल धार्मिक आयोजन में भाग लेने तक सीमित न रखते हुए आत्मकल्याण और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए करना चाहिए।
मंगलाचरण से कलश स्थापना तक चला धर्माराधना का क्रम
महामहोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, आचार्य भगवन्त की संगीतमय पूजन-अर्चना, गुरु चरणों का पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, श्रीफल अर्पण और मंगल कलश स्थापना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं विधिपूर्वक संपन्न हुईं।
श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के चरणों में नमन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। विभिन्न धार्मिक कलशों की बोलियां एवं घोषणाएं भी हुईं। अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि एवं ऋद्धि-सिद्धि के तीन रजतमय कलश समारोह के विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके साथ ज्ञानाराधना, दर्शनाराधना, चारित्राराधना एवं तपाराधना कलश तथा सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान एवं सम्यक्चारित्र भक्ति कलश भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहे।
भक्ति गीतों पर झूमे बच्चे, गुरु भक्ति से सराबोर हुआ परिसर
महामहोत्सव के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने विभिन्न भक्ति गीतों पर मनमोहक सामूहिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। “मंगल अवसर आया है, गुरु कृपा की ये छाया है…”, “मेरे चौखट पर चलके आज चारों धाम आए हैं…”, “बजाओ ढोल स्वागत में मेरे गुरुदेव आए हैं…”, “मेरा हाथ पकड़ ले रे बाबा…” और “झूम-झूम के नाचो रे योग के द्वार पे…” जैसे गीतों पर बच्चों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
वहीं “श्री योगसागर महाराज, मैं दीवाना हूं तेरा…” और “मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल गए हैं, गुरु योगसागर आए हैं…” जैसे भक्ति गीतों के साथ श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति की भावनाएं व्यक्त कीं। पूरा परिसर जिनवाणी, भक्ति और धर्माराधना के मंगलमय स्वरों से गूंजता रहा।

49 वर्ष बाद राजस्थान में पहली बार योगसागर जी महाराज का चातुर्मास
चातुर्मास कमेटी के मुख्य संयोजक हुकम जैन ‘काका’ ने कहा कि यह समस्त समाज के अक्षुण्ण पुण्यों का उदय है कि निर्यापक श्रमण मुनि श्री योगसागर जी महाराज का 49 वर्षों के बाद पहली बार राजस्थान में चातुर्मास हो रहा है और इसका सौभाग्य कोटा के पुण्योदय नसियां जी को प्राप्त हुआ है। उन्होंने इसे कोटा सहित समूचे जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि मुनि श्री योगसागर जी महाराज का अधिकांश समय आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के श्रीचरणों में बीता है। आचार्य भगवन्त के ज्ञान के खजाने की चाबी यदि किसी के पास है तो वह योगसागर जी महाराज के पास है। समाजजनों को प्रतिदिन मुनिश्री की देशना का लाभ लेकर आचार्य भगवन्त के ज्ञान को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
हुकम जैन ‘काका’ ने कहा कि आचार्य भगवन्त के लघुनंदन का यह मंगल चातुर्मास कोटा के लिए ऐतिहासिक अवसर है। समाज की भावना है कि इस चातुर्मास का मंगल संदेश कोटा के प्रत्येक घर तक पहुंचे और अधिकाधिक लोग धर्माराधना से जुड़कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।


गुरु सान्निध्य को भगवान की कृपा बताया प्रहलाद गुंजल ने
कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि गुरुजी के पास भले ही भौतिक धन-दौलत का संग्रह नहीं है, लेकिन उनके ज्ञान के अमूल्य खजाने में आत्मकल्याण का मार्ग मौजूद है। संतों का सान्निध्य सहजता से प्राप्त नहीं होता। भगवान की कृपा के बिना संतों का सान्निध्य मिलना संभव नहीं है और कोटा को योगसागर जी महाराज का सान्निध्य मिलना निश्चित रूप से भगवान की विशेष कृपा है।
उन्होंने कहा कि श्रावण मास में जिस प्रकार वर्षा से धरती हरियाली से भर उठती है, उसी प्रकार हमें भी धर्मगंगा में श्रद्धा की डुबकी लगाकर अपने अंतर्मन में सद्विचार, संस्कार और सत्कर्मों की फसल को हरा-भरा करना चाहिए। गुरु चरणों से होकर ही आत्मकल्याण का मार्ग निकलता है। इसलिए गुरु सान्निध्य को केवल दर्शन तक सीमित न रखते हुए उनकी वाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची गुरु-भक्ति है।
जनप्रतिनिधियों ने श्रीफल अर्पित कर लिया मंगल आशीर्वाद
महामहोत्सव में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल तथा शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती राखी गौतम ने मुनि श्री योगसागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
सैकड़ों पुण्यार्जक परिवारों ने लिया धर्मलाभ
मंदिर अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ एवं महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि प्रथम कलश का पुण्यार्जन पदम जी, श्री राजेन्द्र जी, श्री हुकम जैन ‘काका’, श्री प्रकाश जी एवं समस्त हरसोरा परिवार द्वारा किया गया। द्वितीय कलश का पुण्यार्जन श्री महावीर जी, श्रीमती भारती जी, श्री सिद्धार्थ जी एवं समस्त मित्तल परिवार द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।
तृतीय कलश का पुण्यार्जन श्रीमती सुशीला बाई जी, श्री विवेक जी, श्री अशोक जी, श्री राजकुमार जी, श्री आनंद जी एवं समस्त ठोरा परिवार द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त सैकड़ों पुण्यार्जक परिवारों ने विभिन्न मंगल कलशों की स्थापना कर श्रद्धा और भक्ति के साथ धर्मलाभ अर्जित किया।
महामहोत्सव में बड़ी संख्या में समाजबंधु, श्रद्धालु, धर्मप्रेमी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। पूरे पुण्योदय नसियां जी परिसर में गुरु भक्ति, जिनवाणी, धर्माराधना और आत्मकल्याण की मंगल भावना दिखाई दी।
