Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 26 अगस्त :
राजस्थान के करोड़ों परिवारों की सुबह चाय और दूध के साथ शुरू होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर पहुंच रहा दूध कितना शुद्ध और सुरक्षित है? हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट में दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) ने एक चौंकाने वाला हलफनामा पेश किया है। RCDF के इस खुलासे ने प्रदेश के खाद्य सुरक्षा तंत्र और आम जनता की सेहत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. राजस्थान में दूध उत्पादन और खपत का पूरा गणित
RCDF द्वारा अदालत में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में दूध के उत्पादन और वितरण का गणित कुछ इस प्रकार है:
- कुल दैनिक उत्पादन: राजस्थान में रोजाना लगभग 1000 लाख लीटर (10 करोड़ लीटर) दूध का उत्पादन होता है।
- घरेलू उपभोग: कुल उत्पादन में से लगभग 500 लाख लीटर (50%) दूध ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पशुपालकों और उनके परिवारों द्वारा खुद उपभोग कर लिया जाता है।
- मार्केटेबल सरप्लस (बिक्री योग्य दूध): बाकी बचा हुआ 500 लाख लीटर दूध रोजाना बाजार में बिक्री के लिए आता है।
2. आसान शब्दों में समझें: संगठित (Organized) और असंगठित (Unorganized) दूध बाजार का अंतर
बाजार में बिकने आने वाले 500 लाख लीटर दूध के ढांचे को आम जनता के समझने के लिए दो भागों में बांटा गया है:
- संगठित क्षेत्र (Organized Sector):
इस क्षेत्र में RCDF (सरस) जैसी सरकारी व सहकारी संस्थाएं और रजिस्टर्ड प्राइवेट डेयरी कंपनियां आती हैं। यहां दूध के संकलन से लेकर पैकिंग तक मल्टी-लेयर लैब टेस्टिंग और सख्त नियम (SOP) लागू होते हैं।- कड़वा सच: बाजार के कुल 500 लाख लीटर दूध में से संगठित क्षेत्र के पास केवल 100 लाख लीटर (20%) दूध ही पहुंचता है। इसमें से भी RCDF (सरस) केवल 40 से 45 लाख लीटर दूध के संकलन, प्रसंस्करण और शुद्धता की जिम्मेदारी लेता है।
- असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector):
इस क्षेत्र में आपके घर दूध पहुंचाने वाले स्थानीय दूधिये, बिचौलिए, बिना रजिस्ट्रेशन वाले विक्रेता और खुले में दूध बेचने वाले छोटे डेयरी संचालक आते हैं।- कड़वा सच: बाजार में बिकने वाले 500 लाख लीटर में से लगभग 400 लाख लीटर (80%) दूध असंगठित क्षेत्र के जरिए बेचा जा रहा है। इस दूध की रोजाना लैब जांच, केमिकल/पानी की मिलावट रोकने या हाइजीन बनाए रखने के लिए कोई ठोस सरकारी या पारदर्शी तंत्र मौजूद नहीं है। RCDF ने भी कोर्ट में साफ किया कि इस 400 लाख लीटर दूध पर उनका कोई वैधानिक या कानूनी नियंत्रण नहीं है।
3. RCDF के अपने नियम और मिलावट पर कार्रवाई
RCDF ने कोर्ट को बताया कि वे अपने दायरे में आने वाले 40-45 लाख लीटर दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानक अपनाते हैं:
- यूरिया, डिटर्जेंट, केमिकल या पानी की मिलावट रोकने के लिए संग्रह केंद्रों पर सख्त जांच की जाती है।
- यदि किसी संग्रह केंद्र पर मिलावट पकड़ी जाती है, तो उस केंद्र को तुरंत 3 साल के लिए बैन (काली सूची में) कर दिया जाता है।
- दोषी पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना और पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाती है।
4. राजस्थान हाईकोर्ट का संपूर्ण प्रकरण और कानूनी कार्रवाई
यह पूरा मामला राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ द्वारा प्रदेश में खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट पर लिए गए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) और दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। RCDF द्वारा पेश इस विस्तृत और सनसनीखेज हलफनामे को हाईकोर्ट ने आधिकारिक तौर पर ऑन रिकॉर्ड ले लिया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने पशुपालन विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) की ओर से असंगठित क्षेत्र में हो रही मिलावट की रोकथाम पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की है। हाईकोर्ट ने इस अति-संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को तय की है। अब पूरे प्रदेश की नजरें 16 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं कि अदालत 400 लाख लीटर असंगठित दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने और आम जनता की सेहत की रक्षा के लिए राज्य सरकार को क्या कड़े निर्देश देती है।
