कुनो से राजस्थान पहुंचे 2 चीते, शाहाबाद के जंगलों में किया शिकार, वन विभाग और विशेषज्ञ टीम अलर्ट पर

Written by : लेखराज शर्मा

बारां/शाहाबाद, 26 अगस्त।
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर दो युवा चीते—’OKAD-1′ और ‘OKAD-2’ (उम्र करीब ढाई वर्ष, जो फरवरी 2026 में बोत्सवाना से लाए गए दल का हिस्सा हैं)—राजस्थान के बारां जिले के शाहाबाद वन क्षेत्र में दाखिल हो गए हैं। इन दोनों चीतों की लगातार सक्रियता से एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग में उत्साह के साथ-साथ चौकसी बढ़ गई है।

सीमा में प्रवेश करते ही किया शिकार:
राजस्थान की सीमा में प्रवेश करने के बाद तेलनी वनखंड ‘डी’ और राजपुर-बेहटा के जंगलों में इन चीतों ने दो बकरियों का शिकार किया। शिकार की यह घटना पहली बार कैमरे में कैद हुई है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में हल्की दहशत जरूर है, लेकिन वन विभाग पूरी तरह स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

24 घंटे हो रही है मॉनिटरिंग:
घटना की सूचना मिलते ही डीएफओ विवेकानंद बड़े के निर्देशन में शाहाबाद क्षेत्र के रेंजर मुकेश सुमन अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। कूनो नेशनल पार्क से आई विशेष विशेषज्ञों की टीम भी रेडियो कॉलर आईडी के जरिए दोनों चीतों की हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रख रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके और मवेशी मालिकों को हुए नुकसान का मुआवजा नियमानुसार दिलाया जा सके।

ग्रामीणों के लिए एडवाइजरी जारी:
वन विभाग ने शाहाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। रेंजर मुकेश सुमन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगलों के पास अपने मवेशियों को अकेला न छोड़ें तथा चीतों की हलचल दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।

शाहाबाद वन क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं:
विशेषज्ञों और वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि कूनो के चीतों को शाहाबाद का यह घना जंगल रास आ रहा है, जिससे यह साफ होता है कि चीते इस क्षेत्र को अपने कॉरिडोर और टेरिटरी के रूप में देख रहे हैं। स्थानीय लोगों व प्रेमियों द्वारा इस क्षेत्र को जल्द सेंचुरी घोषित करने की मांग की जा रही है। बता दें कि ‘राजस्थान के चेरापूंजी’ के रूप में प्रसिद्ध शाहाबाद क्षेत्र में शाहाबाद का किला, जलप्रपात कुण्डों खो, पिंडा शील महादेव, तपस्वी जी की बगीची, नगर कोट माताजी मंदिर, शाही जामा मस्जिद, बादल महल और टकसाल जैसे कई ऐतिहासिक एवं दर्शनीय स्थल मौजूद हैं, जो भविष्य में एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं।

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