नवल धर्म सभा का पांचवां राष्ट्रीय अधिवेशन: गूँजी राजनीतिक सशक्तिकरण और समाज सुधार की आवाज

Written by : प्रमुख संवाद

​कोटा, 28 फरवरी।
अखिल भारतीय सतगुरु मात्रंग ऋषि नवल धर्मसभा एवं नवल धर्मसभा यूथ विंग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को कोटा के बोरखेड़ा स्थित श्याम रिसोर्ट में ‘पांचवां राष्ट्रीय अधिवेशन’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशाल वैचारिक महाकुंभ में देश के 12 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास की मुक्ति और राजनीतिक-सामाजिक सशक्तिकरण का संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रहे। जिन्होंने समाज की उन्नति के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। अधिवेशन की अध्यक्षता श्री नवलगुरु गादीपति एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य चरणदास महाराज (जोधपुर) द्वारा की गई। ​कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रदेश अध्यक्ष राकेश सफेला ने स्वागत भाषण दिया और अधिवेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात नारायण डंगोरिया ने समाज की प्रमुख मांगों का ज्ञापन पढ़कर सुनाया।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समाज को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर बल दिया और समाज की मांग पर बालिका छात्रावास बनाने का ठोस आश्वासन दिया। इतना ही नहीं, महर्षि नवल स्वामी के प्रगतिशील विचारों को राज्य के शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बिरला ने मंच से ही कैलाश सोढानी को फोन कर इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

अधिवेशन के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वाल्मीकि समाज के गौरवशाली इतिहास और महर्षि नवल स्वामी के आध्यात्मिक योगदान को नमन किया। उन्होंने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की उन्नति का मार्ग महलों से नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों और पुस्तकालयों से होकर गुजरता है। बिरला ने जोर देकर कहा कि “वाल्मीकि समाज सेवा और समर्पण का प्रतीक है। अब समय आ गया है कि समाज का युवा अपनी बौद्धिक क्षमता और राजनीतिक चेतना को जागृत करे।

​उन्होंने समाज की बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करने हेतु कोटा में एक भव्य बालिका छात्रावास बनवाने का ठोस आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बेटियों की पढ़ाई में धन का अभाव आड़े नहीं आने दिया जाएगा। समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने मंच से ही कैलाश सोढानी को दूरभाष पर निर्देश दिए कि महर्षि नवल स्वामी के मानवतावादी विचारों और उनके जीवन दर्शन को राज्य के शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करने हेतु तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। बिरला ने समाज द्वारा ‘मृत्यु भोज’ जैसी प्रथाओं को त्यागने के संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि फिजूलखर्ची को रोककर वह पैसा बच्चों के भविष्य और तकनीकी शिक्षा पर निवेश किया जाना चाहिए। स्पीकर बिरला ने आह्वान किया कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए युवाओं को सजग प्रहरी बनना होगा।

​अधिवेशन के दौरान समाज की राजनीतिक भागीदारी और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर गहन मंथन हुआ। प्रथम सत्र में जोधपुर में महर्षि नवल स्वामी का भव्य पैनोरमा निर्माण, सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती प्रक्रिया को गति देने और स्वामी जी के जन्मोत्सव पर ‘सवैतनिक अवकाश’ घोषित करने जैसे प्रस्तावों पर सरकार के समक्ष प्रभावी पैरवी करने की रणनीति तैयार की गई। मंच का कुशल संचालन राजकुमार सरसिया ने किया।

​द्वितीय सत्र पूरी तरह से सामाजिक सुधार और कुरीति उन्मूलन को समर्पित रहा। इस दौरान समाज ने एकजुट होकर मृत्यु भोज जैसी आर्थिक रूप से बोझिल कुप्रथाओं पर पूर्ण रोक लगाने और युवाओं को नशे व कुसंगति से दूर रखकर आधुनिक शिक्षा व स्वरोजगार से जोड़ने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में रामचंद्र चांवरिया, राजकुमार सरसिया, आचार्य गणेश जावा, रामगोपाल राजा, राकेश बोयत, नरेंद्र राजा, शरणदास महाराज, संत मुनम दास, बालयोगी ओम नाथ महाराज, बाबा ब्रह्मसाह अतीत, मोहन लाल लखन, लक्ष्मण सिंह चांवरिया, पंकज घेंघट, सुनील रावना, गोलू पचेरवाल, सन्दीप नकवाल, रोशन नाथ, कुलदीप सारवान,
विनोद गुजराती, सुरेश पचेरवाल, रामदयाल नकवाल, श्री नाथ कलोसिया, भगवान सहाय, सुनील पाटोना मौजूद रहे।

आचार्य चरणदास महाराज पुनः निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित
कोटा में आयोजित अखिल भारतीय सतगुरु मात्रंग ऋषि नवल धर्मसभा के पांचवें राष्ट्रीय अधिवेशन के द्वितीय सत्र में एक महत्वपूर्ण सांगठनिक निर्णय लिया गया। समाज की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए सर्वसम्मति से वर्तमान श्री नवलगुरु गादीपति आचार्य चरणदास महाराज (जोधपुर) को पुनः आगामी कार्यकाल के लिए निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।
उनके निर्वाचन की घोषणा होते ही पाण्डाल “नवल स्वामी के जयकारों” से गूँज उठा। देशभर से आए प्रतिनिधियों ने पुष्पहारों से उनका स्वागत किया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष आचार्य चरणदास महाराज ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य वाल्मीकि समाज को कुरीतियों और अंधविश्वास के जाल से मुक्त कर शिक्षा के उजियारे की ओर ले जाना है। उन्होंने राजनीतिक सशक्तिकरण के संकल्प को दोहराते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सामाजिक जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें।

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