Written by : Sanjay kumar
अहमदाबाद/सूरत, 21 मार्च।
गुजरात में अपराध की एक चौंकाने वाली परत तब खुली, जब योग और सेवा के नाम पर चल रही गतिविधियों के पीछे जाली नोटों का संगठित नेटवर्क सामने आया। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक लग्जरी कार से भारी मात्रा में नकली करेंसी बरामद करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बरामदगी इतनी बड़ी थी कि पुलिस को नोटों की गिनती के लिए मशीन मंगवानी पड़ी।

योग केंद्र बना जाली नोटों का अड्डा
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सूरत के कामरेज क्षेत्र में संचालित एक तथाकथित योग संस्था की आड़ में इस पूरे नेटवर्क को खड़ा किया गया। मुख्य आरोपी प्रदीप जोटंगिया, जो खुद को योग गुरु बताता था, आर्थिक तंगी के चलते अवैध गतिविधियों की ओर मुड़ गया। संस्था के संचालन और व्यक्तिगत आर्थिक दबावों ने उसे अपराध के इस रास्ते पर धकेल दिया।
आर्थिक संकट बना अपराध की वजह
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि धन की कमी और जल्दी अमीर बनने की चाह ने उन्हें जाली नोट छापने के लिए प्रेरित किया। गिरोह के अन्य सदस्य, जिनमें जमीन से जुड़े कारोबार करने वाले लोग भी शामिल हैं, ने मिलकर इस अवैध कारोबार को संगठित रूप दिया।
घर में ही तैयार हो रही थी नकली करेंसी
जांच में खुलासा हुआ कि सूरत के सरथाणा क्षेत्र स्थित एक मकान में पिछले तीन महीनों से यह अवैध प्रिंटिंग यूनिट संचालित हो रही थी। यहां कलर प्रिंटर, कटर मशीन और विशेष कागज की मदद से 500 रुपये के जाली नोट तैयार किए जा रहे थे। कागज विदेश से मंगाया गया था, जिससे नोट असली जैसे प्रतीत हों। हैरानी की बात यह रही कि उसी मकान में अन्य लोग रहते हुए भी इस गतिविधि की भनक नहीं लग पाई।
तकनीकी निगरानी से टूटा नेटवर्क
क्राइम ब्रांच को मिली गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई करते हुए अहमदाबाद में एक संदिग्ध वाहन को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहन से बड़ी मात्रा में पैक किए गए जाली नोट बरामद हुए। गिरोह के सदस्य इन्हें बाजार में खपाने के उद्देश्य से ग्राहकों की तलाश में थे।
सूरत में छापेमारी, उपकरण जब्त
गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम ने सूरत पहुंचकर मुख्य आरोपी के सहयोगी के मकान पर छापा मारा। वहां से अतिरिक्त नकली नोट, प्रिंटिंग मशीन, कागज और अन्य सामग्री जब्त की गई। बरामद सामग्री से स्पष्ट हुआ कि यह स्थान पूरे रैकेट का संचालन केंद्र था।
संगठित नेटवर्क, हर सदस्य की तय भूमिका
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम कर रहा था। प्रत्येक सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी—कोई कच्चा माल जुटाता था, तो कोई बाजार में सप्लाई और ग्राहकों से संपर्क साधता था। एक महिला आरोपी की भूमिका भी इस नेटवर्क में सक्रिय पाई गई है।
नेटवर्क की गहराई खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में फैलाई है और किन-किन क्षेत्रों तक इसकी पहुंच रही। आर्थिक लेन-देन और संभावित सहयोगियों की भी गहन जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल जाली नोटों तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध का संकेत देता है, जिसके तार अन्य क्षेत्रों तक भी जुड़े हो सकते हैं। जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
