Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 11 अप्रैल। राजधानी जयपुर में सेक्सुअल इलाज के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जी इंजेक्शन रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
जांच के दौरान गोपालपुरा बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल पर छापा मारकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। अधिकारियों को पता चला कि सेक्स ट्रीटमेंट के नाम पर मरीजों को “ट्राइमेक्स” नाम का इंजेक्शन दिया जा रहा था, जबकि इस नाम की कोई वैध दवा रजिस्टर ही नहीं है।
असल में यह इंजेक्शन तीन अलग-अलग दवाओं—पोपावेरिन, एल्प्रोस्टैडिल और क्लोरप्रोमाजिन—को मिलाकर तैयार किया जा रहा था, जिससे मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि पूरा रैकेट “OH! MAN” नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित किया जा रहा था, जो किसी भी वैध फार्मेसी के रूप में पंजीकृत नहीं है। यह प्लेटफॉर्म मरीजों को इलाज के नाम पर भ्रमित कर डिजिटल ठगी का माध्यम बना हुआ था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड अस्पताल का ही एक कर्मचारी निकला, जो खुद को डॉक्टर बताकर फर्जी प्रिस्क्रिप्शन तैयार करता था और मरीजों से मोटी रकम वसूलता था। वह अस्पताल के दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और जीएसटी नंबर का दुरुपयोग कर लंबे समय से यह अवैध नेटवर्क चला रहा था।
मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। वहीं, ड्रग कंट्रोल विभाग ने मामले में शामिल अन्य लोगों, खासकर संबंधित डॉक्टर की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल प्रशासन ने इस पूरे मामले से खुद को अलग बताते हुए दावा किया है कि उनके यहां केवल वैध और अनुमोदित दवाओं का ही उपयोग किया जाता है और इस अवैध इंजेक्शन रैकेट से उनका कोई संबंध नहीं है।
फिलहाल जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या ऑनलाइन और प्राइवेट इलाज के नाम पर ऐसे और भी “सेक्स ट्रीटमेंट स्कैम” चल रहे हैं? आम जनता को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि भरोसे के नाम पर यह खेल सीधे जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
