Written by : Sanjay kumar
सीजेरियन के बाद मौतों से मचा हड़कंप, जांच पूरी होने तक इंजेक्शन, ग्लूकोस, IV सेट और मेडिकल उपकरणों के उपयोग पर पाबंदी
कोटा, 9 मई। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में राज्य सरकार और ड्रग कंट्रोल विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। एहतियातन प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में उपयोग होने वाली 24 प्रकार की दवाइयों और मेडिकल उपकरणों के इस्तेमाल, सप्लाई और बिक्री पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है।
इन दवाइयों और उपकरणों पर लगी रोक
प्रतिबंधित सामग्री में ऑपरेशन और प्रसूताओं के उपचार में उपयोग होने वाले इंजेक्शन, ग्लूकोस बोतलें, आईवी सेट, सिरिंज और कैथेटर सहित अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण शामिल हैं। इन सभी के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने तक इनके उपयोग पर पूर्ण रोक रहेगी।
ड्रग कंट्रोल विभाग ने जारी किए निर्देश
ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने इस संबंध में राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) और प्रदेशभर के दवा विक्रेताओं को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन दवाओं और उपकरणों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, उनका उपयोग किसी भी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना की दवाइयां भी शामिल
जानकारी के अनुसार, जिन 24 दवाइयों और उपकरणों पर रोक लगाई गई है, उनमें से 15 दवाइयां मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत RMSCL द्वारा कोटा मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराई गई थीं। वहीं 9 अन्य दवाइयां और उपकरण अस्पताल प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर खरीदकर उपचार में उपयोग किए थे।
मौतों के बाद जांच ने पकड़ा जोर
गौरतलब है कि हाल ही में कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की शिकायत सामने आई थी। मामला सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग ने उच्चस्तरीय जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदार माना है।
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई
कार्रवाई के तहत यूटीबी पर कार्यरत डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटाया गया है, जबकि सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार सहित दो नर्सिंग कर्मियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा वार्ड प्रभारी और अन्य चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि पोस्ट गायनी वार्ड में वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं थी और उपचार की जिम्मेदारी रेजिडेंट डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रही थी।
चिकित्सा मंत्री और कांग्रेस ने लिया संज्ञान
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की गहन जांच करवाई जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं कांग्रेस ने भी इस मामले में चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
