Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 9 मई।
शहर के प्रतिष्ठित आध्यात्मिक और सेवा केंद्र ‘गीता भवन’ के 60 साल पुराने श्री राधा-कृष्ण मंदिर के कायाकल्प की ऐतिहासिक शुरुआत शनिवार को हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वैदिक रीति से भूमि पूजन कर नवीन मंदिर का शिलान्यास किया। इस गरिमामयी समारोह में क्षेत्रीय विधायक संदीप शर्मा, भाजपा शहर अध्यक्ष राकेश जैन और नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान मंदिर निर्माण के पुनीत कार्य में सहयोग देने वाले उन भामाशाहों का विशेष सम्मान किया गया। जिन्होंने लगभग 45 लाख रुपए की प्रारंभिक राशि दान स्वरूप भेंट की है।
शिलान्यास के पश्चात उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गीता भवन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह स्थान आध्यात्मिक चेतना और ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ का जीवंत केंद्र बन चुका है। बिरला ने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का युग बताते हुए कहा कि अयोध्या के श्री राम मंदिर से लेकर काशी, महाकाल और राजस्थान के खाटू श्याम व सालासर धाम जैसे आस्था के केंद्रों का पुनर्निर्माण आज दुनिया को शांति का संदेश दे रहा है। उन्होंने कोटा के मथुराधीश जी मंदिर और गोदावरी धाम जैसे स्थानीय तीर्थों के विकास का भी जिक्र किया और घोषणा की कि इंदरगढ़ माताजी मंदिर में जल्द ही रोपवे का निर्माण होगा। जिससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि गीता भवन चिकित्सा और भोजन के क्षेत्र में भी अनुकरणीय कार्य कर रहा है और जल्द ही मथुराधीश जी कॉरिडोर का निर्माण भी शुरू होगा। समारोह में निर्माण संयोजक कृष्ण कुमार खंडेलवाल, सह-संयोजक कुंती मूंदड़ा, मंत्री रामेश्वर प्रसाद विजय, कोषाध्यक्ष गिरिराज गुप्ता, सहसंयोजक कुंती मूंदड़ा, महेंद्र मित्तल सहित प्रबंधन समिति के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
विस्तार और आधुनिक सुविधाओं का होगा संगम
गीता भवन के अध्यक्ष गोवर्धन खंडेलवाल ने मंदिर के तकनीकी पक्षों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान ढांचा 60 वर्ष पुराना और चूने से बना था। जो वर्तमान की बढ़ती भीड़ के लिए छोटा पड़ रहा था। पहले का हॉल मात्र 1350 वर्ग फीट (30 गुणा 45) का था। जिसे अब विस्तारित कर लगभग 7038 वर्ग फीट (102 गुणा 69) का भव्य रूप दिया जा रहा है। कुल 12 हजार वर्ग फीट के निर्मित क्षेत्रफल वाला यह नया मंदिर दो मंजिला होगा। इसमें पहली बार परिक्रमा मार्ग की व्यवस्था की गई है। साथ ही मुख्य हॉल के साथ-साथ फ्रंट व साइड बरामदे, आधुनिक प्याऊ, कार्यालय और स्टोर का निर्माण भी किया जाएगा।
कलात्मक चित्रण और जन्माष्टमी तक निर्माण का लक्ष्य
प्रवक्ता संजय गोयल ने बताया कि मंदिर के प्रथम तल को विशेष रूप से कलात्मक और दर्शनीय बनाया जाएगा। यहाँ भगवान श्री कृष्ण की विविध लीलाओं और श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल उपदेशों का जीवंत चित्रण किया जाएगा। जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। लगभग 2 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनने वाले इस मंदिर के निर्माण में विशेषज्ञ वास्तुकारों और सोमपुरा शिल्पकारों की मदद ली जा रही है। निर्माण समिति ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि आगामी श्री कृष्ण जन्माष्टमी तक इस भव्य ढांचे को पूर्ण कर लिया जाए ताकि श्रद्धालु नए स्वरूप के दर्शन कर सकें।
