राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव टालने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- आखिर कब होंगे चुनाव?

Written by : Sanjay kumar

जयपुर, 11 मई। राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं कराए जाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकार को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है, इसके बावजूद चुनाव लगातार टाले जा रहे हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा

राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से अदालत में आवेदन पेश कर पंचायत और निकाय चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की गई। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि निकाय चुनावों में वार्ड परिसीमन से जुड़े अलग-अलग न्यायिक आदेशों के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई है। साथ ही ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं होने के कारण चुनाव कराना संभव नहीं हो पा रहा है।

ओबीसी आयोग पर कोर्ट के तीखे सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि यदि मुख्य विवाद निकाय चुनावों से जुड़ा था, तो पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं कराए गए। अदालत ने यह भी कहा कि ओबीसी आयोग की स्थिति और उसकी प्रगति को लेकर सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आयोग की स्थिति स्पष्ट होती तो उसे भी आवश्यक निर्देश दिए जा सकते थे।

गर्मी और बारिश के तर्क को कोर्ट ने किया खारिज

सरकार की ओर से अदालत में यह भी दलील दी गई कि जून में राजस्थान में भीषण गर्मी और हीटवेव का दौर रहता है, जबकि जुलाई में बारिश शुरू हो जाती है, जिससे चुनाव कराना कठिन होगा। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को खारिज करते हुए कहा कि राजस्थान के लोग गर्मी से निपटना जानते हैं। वहीं बारिश को लेकर अदालत ने हल्के अंदाज में टिप्पणी की कि “राजस्थान में बरसात?”

डेढ़ साल से चुनाव टालने का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने अदालत में कहा कि सरकार की चुनाव कराने की मंशा नहीं दिख रही और प्रदेश में संवैधानिक संकट जैसी स्थिति बन गई है। पंचायतों और निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह प्रशासक और अधिकारी काम संभाल रहे हैं। वहीं अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने बताया कि प्रदेश की हजारों पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और पिछले डेढ़ वर्ष से चुनाव लगातार टाले जा रहे हैं।

हाईकोर्ट पहले ही दे चुका है समय सीमा

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट भी समय पर चुनाव कराने की आवश्यकता जता चुका है, लेकिन अब सरकार और चुनाव आयोग दोनों ने अतिरिक्त समय की मांग की है।

18 मई को अवमानना याचिका पर सुनवाई

इसी मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी। सरकार ने अपने आवेदन में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, ईवीएम, स्टाफ और अन्य संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए चुनाव आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है।

‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ का भी दिया हवाला

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि आगामी महीनों में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। ऐसे में बाद में चुनाव कराने से “वन स्टेट-वन इलेक्शन” की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी।

Pramukh Samvad

ताजा खबरों को देखने के लिए प्रमुख संवाद से जुड़े

https://www.pramukhsamvad.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!