Written by : Sanjay kumar
4 महिलाओं की मौत के बाद मचा हंगामा, परिजनों ने शव लेने से किया इंकार, अस्पताल में धरने पर बैठे
कोटा, 11 मई। मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और जेकेलोन अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की लगातार मौतों ने प्रदेशभर में चिंता बढ़ा दी है। अब तक चार महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य प्रसूताओं की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। एक महिला की स्थिति में मामूली सुधार होने की सूचना है। पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किडनी संक्रमण से गई जान, एक जैसे लक्षणों से बढ़ी चिंता
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहले प्रसूता पायल और ज्योति की मौत हुई थी। इसके बाद जेकेलोन अस्पताल में बूंदी जिले के सुवासा निवासी 22 वर्षीय प्रिया महावर और डीसीएम श्रीराम नगर निवासी 26 वर्षीय पिंकी महावर की भी मौत हो गई। सभी मामलों में किडनी संक्रमण और सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ने जैसी समान परिस्थितियां सामने आने से संक्रमण और चिकित्सकीय लापरवाही की आशंका गहरा गई है।
दोपहर में डिलीवरी, रात में मौत
मृतका प्रिया के पति रोहित ने बताया कि 8 मई को प्रसव पीड़ा के बाद प्रिया को जेकेलोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी और 9 मई दोपहर करीब डेढ़ बजे ऑपरेशन किया गया। शाम तक उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। रात करीब आठ बजे उसे वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और देर रात उसकी मौत हो गई।
रोहित का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने परिवार को समय पर सही जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि मौत की सूचना देने के बजाय पहले पुलिस को बुलाया गया। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों की लापरवाही के कारण प्रिया की जान गई।
गंभीर हालत में भी एंबुलेंस नहीं मिली
दूसरी मृतका पिंकी महावर की हालत भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद लगातार बिगड़ती रही। परिजनों के अनुसार वह अस्पताल के इमरजेंसी आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती थी। रविवार शाम चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर करने की सलाह दी, लेकिन वेंटिलेटर एंबुलेंस की व्यवस्था तक नहीं कराई गई।
परिजन कई घंटों तक एंबुलेंस के लिए भटकते रहे। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा, लेकिन समय पर उचित उपचार और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। देर रात पिंकी ने भी दम तोड़ दिया।
सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी से बच रहे परिजन
लगातार मौतों के बाद अब सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और उनके परिजनों में भय का माहौल है। कई अस्पतालों में भर्ती से मना किए जाने की बातें भी सामने आई हैं। रामपुरा सेटेलाइट अस्पताल सहित कई जगहों पर महिलाओं को निजी अस्पतालों का रुख करने की सलाह दी जा रही है।
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन पूरी तरह बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है। जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार ओटी वार्ड का ड्यूटी रजिस्टर भी गायब बताया जा रहा है, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया है।
अधीक्षक बोलीं— टैचीकार्डिया से हुई मौत
जेकेलोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने कहा कि प्रिया की मौत टैचीकार्डिया यानी अत्यधिक हार्टबीट बढ़ने के कारण हुई। उन्होंने बताया कि प्रसूता की हार्टबीट 200 से अधिक पहुंच गई थी। उनके अनुसार सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई बार जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं और चिकित्सा विभाग की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। उन्होंने यह भी कहा कि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया, जिससे मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
सरकार ने दिए जांच के आदेश
चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि प्रारंभिक जांच में चिकित्सा प्रोटोकॉल और प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई है। विभाग ने संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, चिकित्सकों और कार्मिकों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुआवजे और कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद कांग्रेस नेताओं और परिजनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मृतक महिलाओं के परिवारों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने, निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग लगातार तेज होती जा रही है। कोटा के सरकारी अस्पतालों में हुई इन मौतों ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
