कोटा, 11 मई।
कॉमर्स कॉलेज मैदान में आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन ‘भगवत भास्कर’ श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर महाराज ने व्यासपीठ से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की अमृत वर्षा की। सोमवार की इस विशेष सभा में महाराज श्री ने जीवन की नश्वरता और आत्मबोध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भक्तों को भावविभोर कर दिया।
कथाव्यास ने जीवन यात्रा की तुलना एक सफर से करते हुए बहुत ही मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा, “संसार की इस यात्रा में हमारे पास जितना कम सामान (मोह-माया और वस्तुएं) रहेगा, हमारा सफर उतना ही आसान और सुखद होगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य अपनी पहचान बाहरी वस्तुओं में खोजता है, जबकि सत्य उसके भीतर है।
श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर ने दर्शन शास्त्र की गहराइयों को छूते हुए कहा कि जब तक मनुष्य स्वयं को शरीर मानता रहेगा, वह दुखों से घिरा रहेगा। उन्होंने कहा, “मुक्त चिंतन करोगे तो पाओगे कि तुम अविनाशी आत्मा हो। सुख-दुख, मान-अपमान सब बुद्धि और मन की प्रक्रियाएं हैं।” उन्होंने एक अद्भुत उदाहरण देते हुए समझाया कि जब मन आत्मा में केंद्रित हो जाता है, तो व्यक्ति को न तो हजार गालियों का असर होता है और न ही हजार मालाएं पहनने का अहंकार।
महाराज श्री ने आत्मबोध के मार्ग पर चर्चा करते हुए कहा कि केवल वन में जाने, जल में तपस्या करने या शास्त्रों के रटने मात्र से ज्ञान नहीं मिलता। आत्मबोध तो केवल किसी महापुरुष के चरणों में बैठकर सत्संग करने से भी प्राप्त हो जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने तुलसीदास जी की चौपाई का गायन किया, ”बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।”
कथा के दौरान महाराज श्री ने भक्ति और ज्ञान के अंतर्संबंध को स्पष्ट करते हुए एक तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस ज्ञान में भक्ति नहीं है, वह कुपुत्र के समान है और जिस भक्ति में ज्ञान का आधार नहीं है, वह बांझ के समान है। उन्होंने भक्तों को प्रेरित किया कि सगुण साकार परब्रह्म परमात्मा, जो हमारे कल्याण के लिए अवतार लेते हैं, उनके स्वरूप का निरंतर चिंतन करें।
भजनों की सरिता में डूबे श्रद्धालु
कथा के दौरान महाराज श्री ने अपनी मधुर वाणी से कई भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पाण्डाल तालियों की गड़गड़ाहट और ‘बांके बिहारी’ के जयकारों से गूंज उठा। भजन के माध्यम से वैराग्य का संदेश देते हुए उन्होंने गाया, “चल रे हंसा उस लोक को, जहां कोई नहीं तेरा…, जग वालों को हुआ अंधेरा, अपना हुआ सवेरा।” तो हर कोई भाव विभोर हो गया। उन्होंने ‘बांके बिहारी’, ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन’ और ‘मन रे कृष्ण नाम कह लीजिए’ जैसे भजनों से भक्तों को नृत्य करने पर मजबूर कर दिया। विशेष रूप से “मेरा गोपाल गिरधारी जमाने से निराला है…” भजन पर भक्त भाव-विभोर हो गए।
मंगलवार को मनेगा भव्य ‘नंदोत्सव’, पीत वस्त्रों में सजेगा गोकुल धाम
महंत अशोक तिवारी ने बताया कि मंगलवार को ‘कृष्ण जन्मोत्सव’ एवं ‘नंदोत्सव’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। महंत अशोक तिवारी ने बताया कि मंगलवार को कथा के पांचवे दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश ठाकुर जी महाराज भी कथा की शोभा बढ़ाएंगे। कथाव्यास श्रीकृष्ण चंद्र ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं को इस आनंदमयी उत्सव के लिए आमंत्रित करते हुए विशेष निर्देश दिए हैं। महाराज श्री ने कहा कि मंगलवार को पूरा पाण्डाल गोकुल में परिवर्तित हो जाएगा।माताएं-बहनें ‘गोपी’ के भाव में और भाई ‘नंद बाबा’ के स्वरूप में कथा स्थल पहुंचेंगे। उन्होंने सभी भक्तों से पीत वस्त्र पहनकर आने का आह्वान किया है। रंगों की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा पीत वस्त्र भक्ति और प्रेम का प्रतीक है। भगवा वस्त्र वैराग्य और ज्ञान का प्रतीक है। शुभ्र वस्त्र परमहंस अवस्था और पवित्रता का प्रतीक है।
सोमवार को तरुण कान्त सोमानी (एडीशनल एस. पी. कोटा), ममता तिवारी, महंत अशोक तिवारी, शिवकान्त नन्दवाना, अनिल तिवारी, नरेन्द्र खण्डेलवाल (लाभी), कपिल शर्मा, राजीव अग्रवाल (पूर्व महापौर), जगदीश जिंदल के साथ कांट्रेक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारी यजमान के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान डॉ. हेमा सरस्वती, गोपाल आनंद महाराज और महंत अशोक तिवारी ने भी व्यासपीठ की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
