नई शुरुआत: मांगलिक अवसरों पर मंगलमुखी किन्नरों की बधाई की राशि और समय सीमा निर्धारित

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 13 मई।
शहर में मांगलिक अवसरों पर किन्नर समाज द्वारा मांगी जाने वाली बधाई राशि को लेकर लंबे समय से चल रहे गतिरोध और मनमानी की शिकायतों पर विराम लग गया है। सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ और कोटा के सात प्रमुख किन्नर क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के बीच हुई तीन घंटे की मैराथन बैठक में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए बधाई राशि और घर आने का समय सर्वसम्मति से तय कर लिया गया है। इस वार्ता की पृष्ठभूमि 10 मई को ‘मातृशक्ति दिवस’ पर आयोजित सर्व हिंदू समाज महिला मंडल महासंघ सम्मेलन में बनी थी, जहाँ 500 से अधिक महिलाओं ने महासंघ के अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल के समक्ष किन्नरों द्वारा की जाने वाली मनमानी और अत्यधिक धन की मांग का मुद्दा उठाया था। महिलाओं की पीड़ा पर त्वरित संज्ञान लेते हुए अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल ने व्यवस्था सुधार का भरोसा दिया था। जिसके बाद किन्नर प्रमुखों ने स्वयं पहल कर अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई।

इसी क्रम में, महामंत्री राजाराम जैन कर्मयोगी के समन्वय से नदी पार क्षेत्र की किन्नर प्रमुख इंदु बाई के निवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में महासंघ के अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल, महामंत्री राजाराम जैन कर्म योगी रावण सरकार एडवोकेट नरेंद्र डाबी परमानंद गर्ग महेश पंचोली बसंत भरावासहित 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और कोटा के विभिन्न क्षेत्रों के 7किन्नर समूह
प्रमुखों में तारा देवी, रीना दीदी, मनीषा बाई, , ममता बाई, इंदु बाई एवं ज्योति बाई ,मंगलम्मुखी नैना देवी ,ने अपने शिष्यों एवं कोटा जिला कलेक्टर द्वारा अधिकृत कोटा जिला ट्रांसजेंडर आइकॉन मंगलमुखी नैना देवी किन्नर सहित शिरकत की। गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि अब से विवाह, जन्मोत्सव और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक अवसरों पर संपन्न वर्ग के लिए बधाई राशि 5,100 से अधिकतम 11,000 रुपये तथा सामान्य एवं मध्यम वर्ग के लिए 1,100 से अधिकतम 5,100 रुपये निर्धारित की गई है। यदि कोई जजमान स्वेच्छा से अधिक राशि देना चाहे तो वह स्वतंत्र है, किंतु किन्नर समाज द्वारा किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या दबाव नहीं बनाया जाएगा।
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए यह तय हुआ कि राशि यथासंभव ऑनलाइन माध्यम से दी जाएगी। सुविधा न होने पर ही नकद भुगतान होगा। इसके अतिरिक्त, किन्नरों के घर पहुंचने का समय प्रातः 9 से दोपहर 2 बजे तक निश्चित किया गया है। हालांकि परिवार के विशेष आमंत्रण पर वे किसी भी समय जा सकेंगे।

महिलाओं की गरिमा का ध्यान रखते हुए यह भी स्पष्ट किया गया कि घर पर पुरुषों की अनुपस्थिति में भी महिलाएं निर्धारित राशि देकर विदा कर सकेंगी और उसे सहर्ष स्वीकार किया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में किन्नर समूह द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन या दुर्व्यवहार किया जाता है, तो पीड़ित पक्ष महासंघ द्वारा जारी मोबाइल नंबर 98293-28525 पर वीडियो या फोटो साक्ष्य भेज सकेगा। जिसके आधार पर क्षेत्रीय किन्नर प्रमुखों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे समझौते को एडवोकेट नरेंद्र डाबी के माध्यम से दस्तावेजी रूप दिया गया है। जिसे शीघ्र ही 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर विधिवत निष्पादित कर सभी पक्षों को सौंपा जाएगा। वार्ता के सफल समापन पर प्रतिनिधिमंडल ने किन्नर प्रमुखों का माल्यार्पण कर मुंह मीठा कराया। इस ऐतिहासिक पहल के सम्मान में आगामी 17 जून, गंगा दशहरा के अवसर पर आम नागरिकों द्वारा किन्नर प्रमुखों का भव्य अभिनंदन किया जाएगा। महासंघ के इस निर्णय से कोटा शहर में एक नई सामाजिक समरसता और पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत हुई है।

Pramukh Samvad

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