कृषि विश्वविद्यालय कोटा के नवम् दीक्षांत समारोह में 358 विद्यार्थियों को उपाधियां

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 13 मई। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि कृषि आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश की बड़ी आबादी की आजीविका कृषि एवं पशुपालन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा के माध्यम से न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है, बल्कि किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और विपणन की जानकारी देकर आत्मनिर्भर भी बनाया जा सकता है।

राज्यपाल बुधवार को कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के नवम् दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे। राज्य कृषि प्रबंध संस्थान (सिआम) ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान और अनुसंधान का उपयोग विकसित भारत के निर्माण में करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और व्यावहारिक समाधानों के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को सरल और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लीकेशन, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रहे हैं।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कृषि स्टार्टअप्स, एग्री-बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग, जैविक खेती, मूल्य संवर्धन और सप्लाई चेन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अवसर तलाशने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा केवल नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बनें।

समारोह में कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि विश्वविद्यालय की डिग्री नई संभावनाओं और जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान का उपयोग किसानों, समाज और राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश का बड़ा हिस्सा कृषि योग्य होने के बावजूद सीमित क्षेत्र ही सिंचित है, ऐसे में आधुनिक तकनीकों का महत्व और बढ़ जाता है।

दीक्षांत अतिथि एवं डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कन्हैयालाल बेरवाल ने युवाओं से कृषि स्टार्टअप और एग्री-बिजनेस के क्षेत्र में आगे आने की अपील की। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों को एआई, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और नैनो टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक विषयों के अध्ययन के लिए प्रेरित करें।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. विमला डूंकवाल ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जबकि कुलसचिव मनीषा तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

358 विद्यार्थियों को उपाधियां, 14 को स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी संकायों के कुल 358 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 209 छात्र और 149 छात्राएं शामिल रहीं। उपाधि प्राप्त करने वालों में 319 स्नातक, 34 स्नातकोत्तर तथा 6 विद्यावाचस्पति अभ्यर्थी शामिल थे।

समारोह में कुल 14 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें कुलाधिपति स्वर्ण पदक एवं कुलपति स्वर्ण पदक भी शामिल रहे।

अकादमिक वर्ष 2024-25 के लिए सुश्री ऐश्वर्या टी.एस. को स्नातकोत्तर (वानिकी) में कुलाधिपति स्वर्ण पदक तथा सुश्री अनुराधा को स्नातक (ऑनर्स) वानिकी में कुलपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

स्नातक वर्ग में नीतू तंवर (कृषि ऑनर्स), राहुल साहू (उद्यानिकी ऑनर्स) और अनुराधा (वानिकी ऑनर्स) को स्वर्ण पदक मिले। वहीं स्नातकोत्तर वर्ग में दिनेश राठौर, विनीता यादव, दीपक कुमावत, यश नागर, निधि कुमारी बुनकर और कुमारी मनीषा को विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।

भवनों का लोकार्पण और नई प्रयोगशालाओं का शिलान्यास

राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों में निर्मित भवनों का लोकार्पण एवं नई प्रयोगशालाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें कृषि अनुसंधान केंद्र कोटा की खरपतवार नियंत्रण प्रयोगशाला, बीज प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, बीज विधायन संयंत्र तथा कृषि महाविद्यालय उम्मेदगंज के अकादमिक भवन शामिल हैं।

इस दौरान “कैनोपी मैनेजमेंट ऑफ फ्रूटक्रॉप” तथा “सोयाबीन के जादुई फायदे–एक बीज कई व्यंजन” पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

समारोह में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. निमित्त चौधरी, कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षाविद, प्रबंध मंडल सदस्य, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Pramukh Samvad

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