Written by : Sanjay kumar
सच की तलाश तेज, जांच के घेरे में दवा, संक्रमण और सिस्टम
जयपुर/ कोटा, 14 मई। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल से जुड़े प्रसूताओं की मौत एवं स्वास्थ्य बिगड़ने के गंभीर प्रकरण ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साथ कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ना और कुछ ही समय में मौत होना अब सामान्य चिकित्सकीय घटना से आगे बढ़कर व्यापक जांच का विषय बन गया है। इसी क्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर गुरुवार को कोटा पहुंचे और अस्पतालों का दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।




अस्पताल पहुंचकर लिया व्यवस्थाओं का जायजा
चिकित्सा मंत्री ने न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था, उपचार प्रक्रिया और घटनाक्रम की समीक्षा की।
12 मरीजों में 4 मौत, कई की हालत स्थिर
मीडिया से बातचीत के दौरान गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि पूरे प्रकरण में कुल 12 महिला मरीज प्रभावित हुई थीं, जिनमें से 4 महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है। शेष मरीजों का उपचार जारी है। एक महिला की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि सात मरीजों की स्थिति स्थिर बताई गई है। तीन मरीजों का डायलिसिस चल रहा है, जिनमें से दो निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।

जांच के घेरे में दवा, संक्रमण और स्टरलाइजेशन
उन्होंने कहा कि सरकार किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की जल्दबाजी नहीं कर रही है। ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण, स्टरलाइजेशन प्रक्रिया, दवाओं की गुणवत्ता तथा फ्लूड से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। दवा एवं अन्य नमूनों की रिपोर्ट आने में 22 से 23 मई तक का समय लग सकता है। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए विसरा नमूनों की रिपोर्ट भी जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
एक ही शहर के दो अस्पतालों में घटना से बढ़ी चिंता
गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि सबसे गंभीर पहलू यह है कि लगभग समान जटिलताओं के साथ एक ही शहर के दो अस्पतालों में यह घटनाक्रम सामने आया है। यही कारण है कि सरकार हर पहलू की गहराई से जांच करवा रही है, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें।
एम्स की विशेषज्ञ टीम करेगी स्वतंत्र जांच
उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा के बाद दिल्ली एम्स की विशेषज्ञ टीम कोटा आकर पूरे मामले की जांच करेगी। सरकार का मानना है कि विशेषज्ञ संस्थान की जांच से मामले के कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकेंगे।
सरकार ने उठाए त्वरित कदम
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। एक मरीज को आवश्यकता पड़ने पर गुरुग्राम स्थानांतरित करने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई थी, हालांकि परिजनों ने सहमति नहीं दी। साथ ही जयपुर से नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को भी तत्काल कोटा भेजा गया।
डॉक्टरों के साथ खड़ी है सरकार
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चिकित्सकों के खिलाफ नहीं है और डॉक्टरों को अनावश्यक रूप से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। पूरे घटनाक्रम में चिकित्सकों ने मरीजों की जान बचाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। हालांकि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दवाओं की सप्लाई भी जांच के दायरे में
गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि मरीजों को दी गई अधिकांश दवाएं आरएमएससीएल की आपूर्ति की थीं, जबकि कुछ दवाएं स्थानीय स्तर पर खरीदी गई थीं। सभी दवाओं एवं संबंधित सामग्री के नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रथम दृष्टया इलाज एवं मॉनिटरिंग प्रक्रिया से जुड़े चिकित्सकों और नर्सिंगकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। हालांकि सरकार का स्पष्ट रुख है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निर्दोष को दोषी नहीं ठहराया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान हैं, जहां हर वर्ष लगभग 18 हजार प्रसव होते हैं और मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम रहती है। ऐसे में एक साथ कई प्रसूताओं का प्रभावित होना चिंता का विषय है और इसकी तह तक जाना आवश्यक है।
