22 लाख सपनों का सौदा?: नासिक से जयपुर, सीकर से हरियाणा तक NEET लीक नेटवर्क की परतें खुलीं; दिनेश–मांगीलाल बिंवाल की भूमिका पर जांच तेज

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा/जयपुर, 15 मई 2026।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में कथित पेपर लीक की जांच अब केवल एक परीक्षा अनियमितता का मामला नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आ रही कड़ियां यह संकेत दे रही हैं कि मामला कई राज्यों में फैले एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। करीब 22 लाख विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस प्रकरण में राजस्थान के जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के जमवारामगढ़ निवासी दिनेश बिंवाल और मांगीलाल बिंवाल का नाम जांच के केंद्र में है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क आखिर शुरू कहां से हुआ और देशभर में किन-किन स्तरों तक फैला।

जांच की पहली कड़ी कहाँ से खुली?

अब तक सामने आई जांच रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती संदेह महाराष्ट्र के नासिक प्रिंटिंग सिस्टम और वहां से जुड़े कथित लीक चैनल पर गया। जांच में यह एंगल सामने आया कि प्रश्नपत्र या उससे संबंधित सामग्री परीक्षा से पहले कुछ लोगों तक पहुंची और बाद में अलग-अलग स्तरों पर “गेस पेपर”, “प्रीमियम सामग्री” या “100% चयन सामग्री” के नाम से आगे बढ़ाई गई। एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि क्या वास्तविक प्रश्नपत्र सीधे लीक हुआ या उसे संभावित प्रश्नों/गेस पैटर्न के रूप में प्रसारित किया गया।

अभी तक जांच में सामने आई कथित श्रृंखला

जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक जो संभावित नेटवर्क उभरकर सामने आया है:

नासिक/महाराष्ट्र लिंक → हरियाणा संपर्क → यश यादव नेटवर्क → विकास बिंवाल संपर्क → दिनेश–मांगीलाल बिंवाल → सीकर कोचिंग/मध्यस्थ नेटवर्क → विभिन्न राज्यों के अभ्यर्थी

रिपोर्टों के अनुसार महाराष्ट्र से जुड़ा एक नेटवर्क कथित रूप से हरियाणा तक पहुंचा, जहां से संपर्क राजस्थान के लोगों तक बना। मांगीलाल बिंवाल के बेटे विकास बिंवाल का नाम भी कुछ रिपोर्टों में सामने आया है, जिसकी जांच जारी है।

“गेस पेपर” मॉडल कैसे काम करता था?

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह केवल “पेपर बेचो–पेपर खरीदो” मॉडल नहीं था। कथित तौर पर कुछ लोगों को कहा जाता था कि यह “गेस पेपर” या “अंदर की सामग्री” है, जबकि उसके वास्तविक स्रोत को छिपाकर रखा जाता था। कुछ अभ्यर्थियों और परिवारों को भरोसा दिलाया जाता था कि प्रश्न लगभग वही आएंगे। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या छात्रों को परीक्षा से पहले सुरक्षित स्थानों पर बुलाकर प्रश्न हल करवाए गए थे।

किन-किन राज्यों तक पहुँचे तार?

जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों में अब तक जिन राज्यों का नाम प्रमुखता से सामने आया:

  • राजस्थान
  • हरियाणा
  • महाराष्ट्र
  • उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि नेटवर्क के संपर्क अन्य राज्यों तक भी हो सकते हैं और डिजिटल माध्यमों से सामग्री भेजने के संकेत मिले हैं। जांच अभी जारी है।

दिनेश–मांगीलाल बिंवाल जांच के केंद्र में क्यों?

दिनेश और मांगीलाल बिंवाल का नाम तब प्रमुखता से सामने आया जब जांच एजेंसियों को राजस्थान के नेटवर्क और कुछ मेडिकल प्रवेशों के बीच संभावित कड़ियां मिलीं। रिपोर्टों में परिवार के कुछ सदस्यों और रिश्तेदारों के मेडिकल क्षेत्र से जुड़े होने का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी भी प्रवेश को अभी अवैध घोषित नहीं किया गया है और जांच जारी है।

अब तक कौन-कौन से नाम सामने आए?

रिपोर्टों में जिन नामों का उल्लेख हुआ:

  • दिनेश बिंवाल
  • मांगीलाल बिंवाल
  • विकास बिंवाल
  • यश यादव
  • राकेश मंडावरिया
  • महाराष्ट्र नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्ध नाम

इन सभी की भूमिकाओं की जांच अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं। अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी है।

आगे क्या होगा?

CBI, SOG और अन्य एजेंसियां अब तीन बड़े सवालों पर काम कर रही हैं:

  1. पेपर या सामग्री सबसे पहले कहाँ से बाहर निकली?
  2. कितने छात्रों तक यह पहुंची?
  3. क्या यह वर्षों से सक्रिय कोई परीक्षा माफिया नेटवर्क था?

यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह सिर्फ पेपर लीक का मामला नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा में भरोसे पर गंभीर हमला माना जाएगा।

Pramukh Samvad

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