ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के प्रयासों से मारवाड़ा बस्ती का हुआ सम्मानजनक पुनर्वास

Written by : प्रमुख संवाद

कोटा, 20 मई।
सांगोद नगर में मिनी सचिवालय निर्माण के मार्ग में वर्षों से बाधक बने अतिक्रमण को बुधवार को नगर पालिका प्रशासन द्वारा हटाया गया। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के विशेष प्रयासों से इस पूरी कार्रवाई को बेहद मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शांतिपूर्ण और संवेदनशील ढंग से संपन्न कराया गया है। विस्थापित परिवारों के उचित पुनर्वास के लिए खेराई बीड़ क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त “महाराणा प्रताप पुनर्वास कॉलोनी” विकसित की गई है। जहाँ सभी पात्र परिवारों को व्यवस्थित रूप से बसाया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री की इस संवेदनशील पहल से वर्षों से लंबित इस समस्या का स्थायी और सम्मानजनक समाधान हो सका है।

​नगर पालिका सांगोद के अधिशाषी अधिकारी मनोज कुमार मालव ने बताया कि पालिका द्वारा 2 अगस्त 2018 को मिनी सचिवालय निर्माण स्थल से विस्थापित होने वाले 43 परिवारों को निःशुल्क भूखंड आवंटन का प्रस्ताव भेजा गया था। दुर्भाग्यवश, लंबे समय तक इस योजना को सक्षम स्तर से स्वीकृति नहीं मिल सकी। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान जब हीरालाल नागर विधायक थे और मिनी सचिवालय का निर्माण कार्य शुरू हुआ, तब इन परिवारों को वहाँ से हटाना प्रस्तावित था। उस समय भी विधायक नागर ने स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए थे कि किसी भी गरीब परिवार को बिना उचित पुनर्वास के उजाड़ा नहीं जाए। उन्होंने साफ कहा था कि पहले इन परिवारों के रहने की पुख्ता व्यवस्था की जाए, उसके बाद ही विस्थापन की कार्रवाई अमल में लाई जाए।

योजना स्वीकृत होते ही नगर पालिका ने युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए खेराई बीड़ क्षेत्र में नई कॉलोनी का खाका तैयार किया और वहाँ आधारभूत सुविधाओं का विकास शुरू कर दिया।सभी विस्थापितों को वैकल्पिक भूखंड सौंपने और उनके पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित होने के बाद ही मिनी सचिवालय के सामने से अतिक्रमण हटाने की विधिक कार्रवाई की गई। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस, प्रशासन और नगर पालिका की टीमें तैनात रहीं और स्थानीय निवासियों के सहयोग से पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

महाराणा प्रताप पुनर्वास कॉलोनी” में बसाए गए विस्थापित परिवार
​नगर मंडल अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सोनी ने बताया कि हीरालाल नागर के ऊर्जा मंत्री बनने पर इस दिशा में प्रयास तेज हुए। उन्होंने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री से बार-बार उच्च स्तरीय वार्ताएं कीं और निरंतर समन्वय बनाए रखा। उनके इन भगीरथ प्रयासों के फलस्वरूप गत 14 अक्टूबर 2025 को इस महत्वाकांक्षी पुनर्वास योजना को राज्य सरकार से वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हुई।

पीएम आवास योजना के तहत मिलेंगे ढाई-ढाई लाख रुपए
​अधिशाषी अधिकारीमनोज कुमार मालव ने बताया कि पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए गत 17 फरवरी 2026 को प्रथम चरण में 36 मारवाड़ा परिवारों को 450-450 वर्ग फीट के आवासीय भूखंडों के आवंटन पत्र सौंप दिए गए थे। इसके साथ ही, राज्य सरकार इन परिवारों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लगभग 2.50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है, ताकि ये परिवार जल्द से जल्द अपने स्वयं के पक्के और सुरक्षित आशियाने का निर्माण कर सकें।

सुव्यवस्थित और संवेदनशील विकास हमारी प्राथमिकता: नागर
“राज्य सरकार की मंशा किसी भी नागरिक या परिवार को असुविधा पहुँचाना या प्रताड़ित करना नहीं है। सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को भी बेहतर, सुरक्षित और व्यवस्थित आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। सरकार इस नई पुनर्वास कॉलोनी में बिजली, पानी और सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं को तेजी से विकसित कर रही है। सांगोद नगर का सुव्यवस्थित, स्वच्छ तथा सुन्दर विकास हमारी प्राथमिकता है।”*

  • हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री
Pramukh Samvad

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