Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 30 जून। रामगंजमंडी के वरिष्ठ पत्रकार राजू राठौर को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखने, मारपीट करने और दुर्भावनापूर्ण तरीके से मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में मंगलवार को कोटा संभाग के पत्रकारों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (JAR) कोटा शहर तथा प्रेस क्लब कोटा के संयुक्त नेतृत्व में पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने कोटा रेंज आईजी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
पत्रकार संगठनों ने जताया आक्रोश
जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के कोटा शहर अध्यक्ष संजय चौबीसा एवं प्रेस क्लब कोटा के महासचिव जितेंद्र शर्मा के नेतृत्व में पत्रकारों ने आईजी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि पत्रकारों के साथ इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर गंभीर आघात होगा।
प्रशासनिक रंजिश का लगाया आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वरिष्ठ पत्रकार राजू राठौर नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार तथा सरकारी भूमि से जुड़े मामलों को लगातार उजागर कर रहे थे, जिसके कारण स्थानीय प्रशासन उनसे रंजिश रखता था। इसी दुर्भावना के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
अवैध हिरासत और मारपीट का आरोप
ज्ञापन के अनुसार 9 जून 2026 को बिना किसी नोटिस अथवा वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए 8 से 10 पुलिसकर्मी राजू राठौर को उनके निवास से उठाकर खैराबाद पुलिस चौकी ले गए। आरोप है कि वहां उनके साथ मारपीट की गई तथा पूरे दिन अवैध रूप से हिरासत में रखने के बाद उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया। पत्रकार संगठनों ने इसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित डी.के. बासु दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन बताया।
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर सीआईडी-सीबी अथवा एसआईटी से कराई जाए। साथ ही दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय और न्यायिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पत्रकार संगठनों ने यह भी मांग रखी कि 9 जून के संबंधित थानों एवं चौकियों के सीसीटीवी फुटेज, रोजनामचा अभिलेख तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड को तत्काल सुरक्षित किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष रूप से हो सके।
आंदोलन की चेतावनी
पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि प्रेस की स्वतंत्रता पर हुए इस कथित हमले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेशभर के पत्रकार संगठन संयुक्त रूप से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने निष्पक्ष जांच के माध्यम से पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
