Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 7 अगस्त। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), कोटा महानगर की महानगर मंत्री दीप्ति मेवाड़ा ने कहा कि, “छात्रसंघ चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नेतृत्व निर्माण का सशक्त माध्यम हैं। विगत वर्षों से चुनाव स्थगित रहने के कारण विद्यार्थी अपने प्रतिनिधियों के चयन के अधिकार से वंचित हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। राज्य सरकार को शीघ्र छात्रसंघ चुनावों की घोषणा कर प्रतिवर्ष नियमित एवं समयबद्ध चुनाव सुनिश्चित करने चाहिए।


इसके साथ ही उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं उत्तरदायी शिक्षा वातावरण मिल सके। यदि सरकार शीघ्र निर्णय नहीं लेती है, तो अभाविप व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगी।”अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), कोटा महानगर द्वारा आज शहर के विभिन्न महाविद्यालयों में लोकतांत्रिक मूल्यों एवं छात्र नेतृत्व निर्माण को सशक्त करने के उद्देश्य से प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने महाविद्यालय परिसरों में छात्रसंघ चुनावों की शीघ्र बहाली की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। इसके साथ ही परिषद द्वारा राजस्थान के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा के नाम ज्ञापन सौंपकर उच्च शिक्षा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु पाँच प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया गया।
परिषद ने ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़ी विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को उठाते हुए कहा कि वर्तमान में राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रशासनिक एवं संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है, जिसके कारण लाखों विद्यार्थियों का शैक्षणिक, शोध एवं प्रतियोगी भविष्य प्रभावित हो रहा है। परिषद ने विद्यार्थी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए त्वरित समाधान की मांग की।
अभाविप ने अपनी प्रमुख मांगों में प्रदेश के सभी राज्य महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में समान अकादमिक कैलेंडर लागू करने, प्रवेश, शिक्षण, परीक्षा, मूल्यांकन एवं परिणाम को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने, रिक्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों पर नियमित नियुक्तियां करने, समस्त राजकीय महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा के स्वतंत्र विभाग स्थापित कर विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भर्ती करने की मांग रखी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं एवं शैक्षणिक आवश्यकताओं की अनदेखी करती है, तो संगठन प्रदेशभर में व्यापक एवं चरणबद्ध आंदोलन करेगा। परिषद का मानना है कि समयबद्ध एवं प्रभावी निर्णयों के माध्यम से ही उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है।
