Written by : लेखराज शर्मा
देवरी (बारां): 7 अगस्त। राजस्थान सरकार भले ही मंचों से विश्वस्तरीय शिक्षा के लंबे-चौड़े दावे कर ले, लेकिन धरातल पर सरकारी शिक्षा तंत्र पूरी तरह लाचार और खोखला नजर आता है। जब देश के कर्णधारों को तिरपालों के नीचे शिक्षा मिलेगी तो क्या उनके मन में पढ़ाई के प्रति कोई लगाव बचेगा? ऐसा लगता है मानो सरकार का शिक्षा मंत्रालय सरकारी स्कूलों को खुद अंदर से दीमक की तरह चाटकर निजी स्कूलों की दुकानें चमकाने के खेल में जुटा हुआ है। जिस मंत्रालय की जिम्मेदारी देश के भावी डॉक्टरों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की बुनियाद तैयार करने की थी, वह खुद बेपरवाह और संवेदनहीनता की नींद सो रहा है। बड़े-बड़े बयान देने वाले शिक्षा मंत्री को यह सोचना चाहिए कि जब शुरुआती शिक्षा की जड़ें ही सुखा दी जाएंगी, तो देश का भविष्य कैसे हरा-भरा होगा? बुनियादी सुविधाओं के बिना दम तोड़ते इन सरकारी विद्यालयों को देखकर तो यही लगता है।
इसी क्रम में बारां जिले के अंतिम छोर पर बसे देवरी क्षेत्र से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढिलाई को उजागर करने वाली एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय सनगवां में पढ़ने वाले करीब 53 नौनिहाल बिना किसी पक्के भवन के, घास-फूस और तिरपाल से बनी झोपड़ी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
कड़ाके की धूप, भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में भी बच्चे और शिक्षक खुले मैदान में बनी इस अस्थायी टापरी के नीचे बैठने को लाचार हैं।
13 वर्ष में ही ढह गई घटिया निर्माण की पोल
ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 13 वर्ष पूर्व लाखों रुपए की लागत से राजकीय प्राथमिक विद्यालय सनगवां के पक्के भवन का निर्माण करवाया गया था। आरोप है कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत के कारण निर्माण कार्य में भारी लीपापोती की गई। गुणवत्ताहीन कार्य के चलते यह भवन बहुत ही कम समय में पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ध्वस्त हो गया।
सुविधाओं का अभाव, शिक्षण सामग्री की सुरक्षा पर संकट
भवन न होने के कारण शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ शिक्षण सामग्री और प्रशासनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। वर्तमान में किसी तरह मां बाड़ी केंद्र में एक छोटा सा ऑफिस बनाकर रिकॉर्ड रखा जा रहा है, जबकि बच्चे मैदान में तिरपाल के नीचे बैठकर पढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों की जुबानी:
“हमने ग्राम पंचायत बीलखेड़ा डांग के प्रशासन शहरों/गांवों के संग शिविर में तहसीलदार को लिखित शिकायत दी। शाहाबाद जाकर उपखंड अधिकारी (SDO) को भी नए भवन निर्माण के लिए ज्ञापन सौंपा, लेकिन आज तक किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली।”
— सुरेश, उदय, महेंद्र, परशु सहरिया व एसएमसी अध्यक्ष छोटेराम (स्थानीय ग्रामीण)
अभिभावकों में भारी आक्रोश:
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ सरकार शिक्षा का अधिकार और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ देवरी के सनगवां में बच्चे भवन, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नए भवन का निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
