बूंदी जनाना अस्पताल में प्रसूता की मौत पर हंगामा, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप

Written by : Sanjay kumar

प्रसव के बाद बिगड़ी निशा की तबीयत, मौत से आक्रोशित परिजनों ने तीन घंटे किया प्रदर्शन; नवजात को कोटा रेफर किया

बूंदी, 9 अगस्त। बूंदी के सरकारी जनाना अस्पताल में रविवार को प्रसव के बाद 26 वर्षीय प्रसूता की मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल परिसर में करीब तीन घंटे तक हंगामा किया। परिजनों ने चिकित्सक पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए अस्पताल में अतिरिक्त पुलिस जाप्ता तैनात करना पड़ा।

प्रसव के कुछ देर बाद बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार धनातरी निवासी निशा पत्नी जगदीश को प्रसव के लिए शुक्रवार को स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चन्द्रेश मीना को दिखाया गया था। चिकित्सक की सलाह पर निशा को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों के अनुसार शनिवार को चिकित्सक ने वार्ड में राउंड के दौरान निशा को देखा था और सामान्य प्रसव से बच्चे के जन्म की बात कही थी।

लड़के को जन्म देने के बाद अचानक बिगड़ी हालत

रविवार सुबह करीब 11 बजे निशा ने एक लड़के को जन्म दिया। प्रसव के कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। करीब पौने 12 बजे उसकी मौत हो गई। प्रसूता की अचानक मौत से परिजन स्तब्ध रह गए और अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।

नवजात की हालत बिगड़ने पर कोटा रेफर

प्रसव के बाद नवजात की भी हालत गंभीर बताई गई। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती नवजात को उपचार के लिए कोटा रेफर किया गया। अस्पताल प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में नवजात को कोटा भेजा गया।

डॉ. चन्द्रेश मीना पर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद डॉ. चन्द्रेश मीना नियमित रूप से निशा को देखने नहीं आए और उपचार की जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ एवं रेजिडेंट चिकित्सकों के भरोसे छोड़ दी गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि प्रसव के दौरान मौके पर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। हालांकि, प्रसूता की मौत की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शव को मोर्चरी ले जाने पर बढ़ा विवाद

हंगामे के दौरान पुलिस ने लेबर वार्ड से शव को बाहर निकालकर मोर्चरी ले जाने के लिए निजी एम्बुलेंस में रखवा दिया। इसकी जानकारी मिलते ही परिजनों ने एम्बुलेंस को रोक लिया और कुछ लोगों ने पत्थर उठा लिए। इससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस जाप्ता बुलाया गया। सूचना पर उपखंड अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

समझाइश के बाद शव मोर्चरी पहुंचाया

मौके पर मौजूद मीना समाज के जिलाध्यक्ष रामेश्वर सिंह छरकवाड़ा सहित अन्य लोगों ने आक्रोशित परिजनों से समझाइश की। काफी प्रयासों के बाद मामला शांत हुआ और मृतका के शव को मोर्चरी पहुंचाया गया। अस्पताल परिसर में देर शाम तक पुलिस जाप्ता तैनात रहा।

अस्पताल प्रशासन ने बताई अलग वजह

डॉ. अमर के अनुसार शनिवार शाम चेकअप के दौरान निशा और उसके परिजनों को सीजेरियन डिलीवरी की सलाह दी गई थी, लेकिन परिजन सामान्य प्रसव कराने पर सहमत थे। उनके अनुसार प्रसव के बाद नवजात की सांस रुक गई थी, जिसे सीपीआर देकर बचाया गया। प्रसूता की मौत का प्रथम दृष्टया कारण हृदय में रक्त का थक्का जमना बताया गया है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

Pramukh Samvad

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