Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 22 अगस्त। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने राजकीय विद्यालयों में बाहरी हस्तक्षेप और शिक्षकों को राजनीतिक विवादों में घसीटने का पुरजोर विरोध किया है। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास और उज्ज्वल भविष्य निर्माण के केंद्र हैं, उन्हें राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा।
वैधानिक प्रक्रिया से हो शिकायतों का समाधान
प्रदेश उपाध्यक्ष पूरणमल नागर ने हालिया विद्यालय विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि महासंघ किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता। विद्यालयों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के पास निर्धारित वैधानिक माध्यम उपलब्ध हैं, इसलिए बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है।
शिक्षक राजनीतिक गतिविधियों का माध्यम नहीं
प्रदेश उपाध्यक्ष (प्राथमिक शिक्षा) नवलकिशोर शर्मा ने कहा कि विद्यालयों में प्रवेश निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं और उन्हें किसी राजनीतिक एजेंडे का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
शांति और सौहार्द की अपील
प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ सदस्य सुरेश कुमार बैरागी ने ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों से शांति बनाए रखने तथा विवादों का समाधान कानून एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से करने की अपील की। उन्होंने बताया कि राजस्थान के 10 हजार से अधिक विद्यालयों में महासंघ से जुड़े शिक्षक शैक्षणिक गुणवत्ता और संसाधनों के विकास के लिए सक्रिय हैं।
ये पदाधिकारी रहे उपस्थित
प्रेस वार्ता में गिरिजा सुमन (प्रदेश सह संगठन मंत्री), सुरेश कुमार बैरागी (संभाग मीडिया प्रभारी), रासबिहारी यादव (जिलाध्यक्ष, कोटा), सत्येंद्र चौहान (जिला मंत्री, कोटा), अशोक नागर (जिला कोषाध्यक्ष, कोटा) सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
