श्री मथुराधीश मंदिर पर छाया नंदोत्सव का उल्लास, निधि स्वरूप के दर्शनों को उमड़े वैष्णव, बधाइयां गूंजी

Written by : प्रमुख संवाद

स्वर्ण जड़ित पालने में विराजे मथुराधीश प्रभु, लाला को खिलौनों से रिझाया

कोटा, 17 अगस्त।
शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर पर रविवार को नंदोत्सव का उल्लास छाया रहा। निधि स्वरुप मथुराधीश प्रभु के दर्शनों के लिए पाटनपोल में लंबी कतारें लगी। जो मथुराधीश मंदिर से भूरिया गणेश जी तक पहुंच गई। पूरे नंदग्राम में मथुराधीश प्रभु के जयकारे गूंज रहे थे।

मंदिर पर सुबह से ही ठाकुर जी स्वर्ण जड़ित पलना में विराजमान रहे। जिन्हें एक टक देखने के लिए भक्त पूरे दिन उमड़ते रहे। महिलाएं दर्शन करते हुए लाला की बलाइयां लेती रहीं। नंदोत्सव के दौरान बधाइयां गूंजती रहीं। प्रथम पीठ युवराज गोस्वामी मिलन कुमार बावा ने मथुराधीश प्रभु की स्त्री भाव से सेवा की। उन्होंने यशोदा का रूप धरकर लाला का पलना झुलाया। वहीं मुखिया जी नन्दराय और सभी सेवक ग्वाल बाल बने। लाला को तरह-तरह के खिलौने से रिझाया गया। हल्दी मिला हुआ दूध, दही उछाला गया तो भक्त भी “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की…” गाते हुए झूम उठे।

मंदिर में प्रभु का संकीर्तन हर किसी को भाव विभोर कर रहा था। इस दौरान दोपहर को मंगला, अपराह्न राजभोग तथा शाम को संध्या आरती के दर्शन हुए। माता यशोदा का प्रतिरूप बने मिलन कुमार बावा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए भी भक्तों का तांता लगा रहा। यहां जगह- जगह शीतल जल और अल्पाहार की व्यवस्था की गई थी। वहीं व्यापारियों ने भक्तों के लिए कूलर तथा पंखे लगाए थे। फूलों से सजे नंदग्राम में भीनी भीनी खुशबू महक रही थी।

Pramukh Samvad

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