Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 4 जनवरी।
पैरामेडिकल भर्ती को लेकर संघर्ष कर रहे युवाओं ने रविवार को अपने आंदोलन को एक नए और भावनात्मक मुकाम तक पहुंचा दिया। पैरामेडिकल संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में स्याही नहीं, बल्कि अपने खून से 500 से अधिक पत्र मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री के नाम लिखकर भेजे। यह कदम अभ्यर्थियों के धैर्य, त्याग और अपनी मांगों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अभ्यर्थियों की मांग स्पष्ट और तर्कसंगत है। आने वाली पैरामेडिकल भर्ती—जिसमें लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर और ईसीजी टेक्नीशियन जैसे पद शामिल हैं—उसमें चयन प्रक्रिया मेरिट प्लस बोनस (10, 20, 30 अंक) के आधार पर की जाए। युवाओं का कहना है कि वे वर्षों से अल्पवेतन पर कार्य कर रहे हैं और कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेश की सेवा कर चुके हैं। अब जब स्थायी भर्ती का समय आया है, तो उनके साथ न्याय होना चाहिए।
संघर्ष समिति का कहना है कि खून से लिखे गए ये पत्र केवल कागज नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीदों और संघर्ष की आवाज हैं, जो लंबे समय से स्थायी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। समिति ने साफ किया कि उनकी मांग सिर्फ एक है—मेहनत का सम्मान और भर्ती पूरी तरह मेरिट आधारित हो।
इसी क्रम में रविवार सुबह पैरामेडिकल संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने राजस्थान के पंचायती राज एवं शिक्षा राज्य मंत्री मदन दिलावर से उनके आवास पर मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को अवगत कराया कि पैरामेडिकल के अंतर्गत आने वाले सभी संवर्गों की भर्ती मेरिट प्लस बोनस आधार पर की जाए तथा भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए।
इस पर पंचायती राज एवं शिक्षा राज्य मंत्री मदन दिलावर ने अभ्यर्थियों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि वे इस विषय में राजस्थान सरकार से बातचीत करेंगे और जल्द ही उचित कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा।
पैरामेडिकल संघर्ष समिति ने दोहराया कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

