Written by : प्रमुख संवाद
‘राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा का सदुपयोग करें’ — राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
कोटा, 22 जनवरी। राजस्थान के माननीय राज्यपाल एवं वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब उसका उपयोग राष्ट्र के उत्थान और व्यक्ति के सर्वांगीण निर्माण के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि वही शिक्षा सच्ची है, जो जीवन को गरिमामय, आनंदमय और गौरवपूर्ण बनाए।
राज्यपाल बागडे गुरुवार को वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा के 18वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्तीर्ण 75,925 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा तीन शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई।

अपने प्रेरणादायी संबोधन में कुलाधिपति ने दीक्षित विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान और डिग्रियों का उपयोग अपनी बौद्धिक क्षमताओं के विस्तार, प्रतिभा के परिष्कार और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना के साथ समाज व देश की सेवा में करें। उन्होंने देव–दानव संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि सहयोग, सहचर्य और एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की मानसिकता से ही विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है।
राज्यपाल ने तैत्तिरीय उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, स्वामी विवेकानंद एवं महर्षि अरविंद के विचारों का संदर्भ देते हुए गुरु–शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानार्जन में गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और अनुशासन उतना ही आवश्यक है जितना अध्ययन। साथ ही उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे निरंतर अध्ययनशील रहें और विद्यार्थियों को संतानवत् स्नेह देते हुए उनमें संस्कार, जीवन-मूल्य, नैतिकता और चारित्रिक दृढ़ता का विकास करें।
‘ईमानदारी आभूषण, कर्तव्य धर्म और राष्ट्रहित सर्वोपरि रखें’ — उपमुख्यमंत्री
समारोह के विशिष्ट अतिथि उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि दीक्षा प्राप्त विद्यार्थी विकसित भारत की नींव के सशक्त स्तंभ हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जिस भी क्षेत्र में कार्य करें, ईमानदारी को आभूषण, कर्तव्य को धर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
डॉ. बैरवा ने कहा कि नई शिक्षा नीति–2020 शिक्षा के नए युग की आधारशिला है, जो केवल डिग्री तक सीमित न होकर चारित्रिक विकास, कौशल संवर्धन और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। इसी नीति के अनुरूप वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय नियमित शिक्षा से वंचित रहे विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा उच्च शिक्षा और महिला शिक्षा के विस्तार हेतु किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
‘डिग्रियां राष्ट्र का विश्वास हैं’ — राज्य मंत्री प्रो. मंजू वाघमार
सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्य मंत्री प्रो. मंजू वाघमार ने कहा कि दीक्षा प्राप्त विद्यार्थी भारत की आशाओं और आकांक्षाओं के प्रतिनिधि हैं तथा उनकी डिग्रियां राष्ट्र के विश्वास का प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा को सुविधा नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
‘दूरस्थ शिक्षा, शिक्षा के लोकतांत्रीकरण का सशक्त माध्यम’ — प्रो. उमा कांजीलाल
दीक्षांत अतिथि एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. उमा कांजीलाल ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था शिक्षा के लोकतांत्रीकरण का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय को शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में अग्रणी बताते हुए कहा कि यह समावेशी विकास के राजस्थान मॉडल का प्रभावी प्रस्तुतीकरण है।
इससे पूर्व विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.एल. वर्मा ने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अकादमिक एवं शिक्षणेतर गतिविधियों तथा उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
समारोह में लाडपुरा विधायक कल्पना देवी, जिला भाजपा अध्यक्ष राकेश जैन, कोटा विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय एवं राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु, संकाय सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. पुरवा अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
