भारत में सोना और चांदी ने तोड़े रिकॉर्ड: Bullion Market में तेज़ी जारी! वजह क्या है जाने..?

Written by : Sanjay kumar

दिनांक: 22 जनवरी 2026
स्थान: नई दिल्ली, भारत

भारतीय सर्राफा बाजार में आज एक ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है, जहाँ सोने और चांदी की कीमतों ने अब तक के अपने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे निवेशकों और आम जनता दोनों में उत्सुकता और चिंता का माहौल बना हुआ है।

मुख्य बिंदु:

  • 🇮🇳 सोना: 99.9% शुद्धता वाला सोना स्थानीय बाजार में ₹1,58,000 से ऊपर पहुंच गया, जो कि सर्वकालिक उच्च स्तर है और यह ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब है।
  • 💎 चांदी: चांदी ने ₹3.34 लाख प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर पार कर लिया, लगातार तेजी के चलते निवेशकों की मजबूत मांग बनी हुई है।
  • 🌍 अंतरराष्ट्रीय स्तर: वैश्विक बाजारों में सोना पहली बार $4,800 प्रति औंस से ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो सुरक्षित-धन संपत्ति की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
  • 📈 कुछ अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के अनुसार 2026 के अंत तक सोना ₹1,75,000–₹1,95,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3,80,000–₹4,60,000 प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

📊 क्या वजह बनी इतनी तेजी की?

1. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव

विश्व स्तर पर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड टैरिफ और राजनयिक तनाव के चलते निवेशक सुरक्षित-धन की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सोने और चांदी को “Safe Haven” संपत्ति के रूप में चुना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी नीतिगत दबाव, टैरिफ विवाद और यूरोप के साथ व्यापार चिंताओं ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे बुलियन की मांग में भारी उछाल आया है।


2. रुपये की कमजोरी और आयात दबाव

भारतीय मुद्रा रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है (लगभग ₹91.74 का रिकॉर्ड निचला स्तर) जिस कारण सोना और चांदी के आयात महँगे पड़े और स्थानीय बाजार में प्रीमियम बढ़ गया।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार आयात शुल्क में वृद्धि करती है तो प्रीमियम और कीमतों में और इज़ाफ़ा संभव है।


3. सुरक्षित निवेश की ओर शिफ्ट

खतरे के समय निवेशक शेयर बाजार, क्रिप्टो और अन्य जोखिम वाले एसेट से निकलकर सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेशों में धन स्थानांतरित कर रहे हैं, जिससे इनकी कीमतों में असामान्य वृद्धि देखने को मिल रही है।

विशेष रूप से चांदी की मांग में तेजी आई है क्योंकि यह न केवल सुरक्षित निवेश के रूप में प्रयोग होती है बल्कि उद्योगों—जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोग्राफ़ी, सौर ऊर्जा और EV बैटरियों—में भी इसकी मांग बढ़ी है।


📉 विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

कमोडिटी मार्केट विश्लेषक डॉ. अनुज वर्मा कहते हैं:

“बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर मुद्रा के समन्वय ने सोने और चांदी को 2026 में नए ऐतिहासिक उच्च स्तर पर धकेल दिया है। इन धातुओं में निवेश चुनिंदा रणनीतियों और जोखिम सहनशीलता के आधार पर किया जाना चाहिए।”

आर्थिक सलाहकार सुचित्रा रेड्डी बताती हैं:

“यह रैली केवल भावनात्मक नहीं है—केंद्रीय बैंकों द्वारा बुलियन खरीद, मुद्रा नीति अनिश्चितता, और व्यापार बाधाएं कीमतों को ऊँचा धकेल रही हैं। लंबी अवधि के निवेशकों को धीरे-धीरे मौका मिल सकता है, पर उतार-चढ़ाव का समय अभी जारी रहने की संभावना है।”


🌐 वैश्विक बाजारों का प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बुलियन रैली विगत कुछ हफ्तों से जारी रही है—सोना $4,800+ प्रति औंस पर और चांदी ~$93+ प्रति औंस तक पहुंच चुकी है, जो पिछले रिकॉर्ड स्तरों को तोड़ रही है।

अन्य वैश्विक कारणों में शामिल हैं:

  • प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बुलियन खरीद
  • अर्थव्यवस्था में धीमी वृद्धि और ब्याज दरों में संभावित कटौती के संकेत
  • निवेश संरचनाओं में विविधता की आवश्यकता

📌 निवेशकों के लिए संदेश

सोने और चांदी की इस अभूतपूर्व रैली ने दिखाया है कि भू-राजनीतिक जोखिम, मुद्रा उतार-चढ़ाव और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता सोने-चांदी की कीमतों को कितनी तेजी से प्रभावित कर सकती हैं।

निवेशक सलाह:
👉 यदि आप बुलियन में निवेश करना चाहते हैं तो

  • बाजार की वर्तमान स्थितियों पर पैनी नजर रखें
  • दीर्घकालिक और अल्पकालिक रणनीतियों में संतुलन बनाएँ
  • निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से सलाह लें

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