150 वर्षों की राष्ट्रगाथा – ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ भारत ने मनाया 77वां गणतंत्र दिवस

Written by : Sanjay kumar

नई दिल्ली, 26 जनवरी 2026। भारत ने आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे राष्ट्रीय गौरव, गरिमा और उल्लास के साथ मनाया। राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देश को संबोधित किया। इस अवसर पर 21 तोपों की सलामी दी गई तथा राष्ट्रगान की गूंज के साथ पूरे वातावरण में देशभक्ति का संचार हुआ।

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की केंद्रीय थीम ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ रही, जो राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक यात्रा को रेखांकित करती है। यह थीम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक की उस चेतना का प्रतीक बनी, जिसने पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम से जोड़े रखा।

मुख्य अतिथि और अंतरराष्ट्रीय संदेश

इस ऐतिहासिक अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष श्री एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनकी उपस्थिति ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग को नई मजबूती देने का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके पश्चात राष्ट्रपति का औपचारिक आगमन हुआ और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ परेड का शुभारंभ किया गया।

भव्य परेड और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की टुकड़ियों ने अनुशासन, शौर्य और पराक्रम का अद्भुत प्रदर्शन किया। आधुनिक हथियार प्रणालियों, स्वदेशी रक्षा तकनीकों, मिसाइल प्रणालियों, टैंकों और सैन्य वाहनों ने भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाया।

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों द्वारा किए गए एरियल फ्लाय-पास्ट ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। यह प्रदर्शन भारतीय सैन्य ताकत, तकनीकी दक्षता और तैयारियों का सशक्त प्रतीक रहा।

वीरता पुरस्कार और सम्मान

परेड के दौरान परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र सहित अन्य वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों और उनके परिजनों की उपस्थिति ने समारोह को भावुक और गौरवपूर्ण बना दिया। यह क्षण राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक रहा।

सांस्कृतिक विविधता की झलक

गणतंत्र दिवस परेड में देश की सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों में लोकनृत्य, परंपराएं, कला, इतिहास और विकास की झलक प्रस्तुत की गई। इन झांकियों के माध्यम से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सजीव रूप में दर्शाया गया।

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षीय यात्रा को समर्पित विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रनिर्माण और आधुनिक भारत की प्रगति की कहानी को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा।

जनभागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्य

इस वर्ष के समारोह में किसानों, वैज्ञानिकों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवा प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों की विशेष भागीदारी रही। यह सहभागिता भारतीय लोकतंत्र की समावेशी और जनकेंद्रित प्रकृति को दर्शाती है।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं

गणतंत्र दिवस समारोह के सफल आयोजन के लिए राजधानी दिल्ली में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। आधुनिक तकनीक, निगरानी प्रणालियों और हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ आयोजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।

समापन और राष्ट्र संदेश

77वां गणतंत्र दिवस समारोह भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और सैन्य शक्ति का भव्य उत्सव साबित हुआ। ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि भारत अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ, आत्मनिर्भर और वैश्विक मंच पर सशक्त राष्ट्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन आगामी दिनों में आयोजित होने वाले ‘बीटिंग द रिट्रीट’ कार्यक्रम के साथ होगा, जो सैन्य संगीत और परंपरा के माध्यम से इस राष्ट्रीय पर्व को गरिमामय विदाई देगा।

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