Written by : Sanjay kumar
रांची, 01 फरवरी। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे) की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में संगठनात्मक विस्तार, संविधान संशोधन और लंबित चुनावों के साथ-साथ फर्जी संगठनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा हुई। रांची प्रेस क्लब में आयोजित इस बैठक की कार्यवाही तीन चरणों में संपन्न हुई।
बैठक का शुभारंभ झारखंड के महासचिव राजीव नयनम के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए रांची में बैठक आयोजित करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया। इसके बाद एनयूजे के महासचिव प्रदीप तिवारी ने विषय प्रवेश करते हुए दिल्ली कार्यालय के संचालन, संगठन के विस्तार, चुनाव प्रक्रिया और वर्तमान गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की।
राष्ट्रीय अध्यक्ष रासबिहारी ने संगठन के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एनयूजे के नाम का दुरुपयोग करने वाले फर्जी संगठनों के खिलाफ अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद जो लोग संगठन के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके खिलाफ अब अलग-अलग राज्यों में भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सभी संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर वास्तविक स्थिति से अवगत कराने का निर्णय लिया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन की वर्तमान आर्थिक स्थिति का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यूनियन का चुनाव फिलहाल लंबित है, जिसे शीघ्र पूरा किया जाना आवश्यक है। उन्होंने प्रस्तावित संविधान संशोधन की पृष्ठभूमि और आवश्यकता पर भी विस्तार से जानकारी दी। रासबिहारी ने कहा कि फर्जी समाचारों के बढ़ते चलन से पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। वहीं, सरकार और समाचार संस्थानों द्वारा ट्रेड यूनियन गतिविधियों के प्रति बढ़ते विरोध के कारण यूनियन की भूमिका और जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उड़ीसा के प्रदेश अध्यक्ष प्रसन्न मोहनती ने कहा कि संगठन के सामने चुनौतियां गंभीर हैं और नए पदाधिकारियों को आगे आकर जिम्मेदारी संभालनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि चुनाव प्रक्रिया की घोषणा हो चुकी है, इसलिए वर्तमान समय में संविधान संशोधन करना उचित नहीं होगा। नई कार्यकारिणी के गठन के बाद नियमानुसार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
बैठक में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम को लेकर अनौपचारिक चर्चा भी हुई। इस पर सहमति बनी कि जो पदाधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं थे, उनसे भी इस विषय पर राय ली जाएगी। चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने दूरभाष पर बताया कि बीमारी के कारण दिल्ली से बाहर रहने की वजह से उन्हें चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक सहयोगी की आवश्यकता है।
बैठक में राजस्थान से राकेश कुमार शर्मा और सुरेश पारीक, हिमाचल प्रदेश से रनेश राणा, त्रिपुरा से प्रशांत चकवर्ती सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और असम से आए प्रतिनिधियों ने संगठनात्मक विषयों पर सक्रिय भागीदारी निभाई।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि चुनाव लंबित रहने की स्थिति में वर्तमान राष्ट्रीय कमेटी के कार्यकाल को चार महीने के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव राष्ट्रीय कार्यकारिणी की औपचारिक बैठक में पारित किया जाएगा। इसी अवधि के भीतर नए पदाधिकारियों का चुनाव संपन्न कराने पर सहमति बनी।
उल्लेखनीय है कि इसी आयोजन स्थल पर एक फरवरी को एनयूजे का झारखंड प्रदेश स्तरीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें भाग लेने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों से प्रतिनिधि रांची पहुंचने लगे हैं।
