भामाशाह मंडी में किसानों के मुद्दों पर बुलाई बैठक हंगामे में तब्दील, समाधान के बजाय मंडी अध्यक्ष का वॉकआउट

Written by : Sanjay kumar
कोटा, 17 मार्च 2026

संभाग की सबसे बड़ी भामाशाह कृषि उपज मंडी में किसानों की समस्याओं और अव्यवस्थाओं को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। भारतीय किसान संघ की मांग पर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार एडीएम (प्रशासन) की अध्यक्षता में मंडी समिति सभागार में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य किसानों के ज्वलंत मुद्दों का समाधान करना था, लेकिन चर्चा के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया।

बैठक में उस समय स्थिति बिगड़ गई जब मंडी समिति अध्यक्ष अविनाश राठी किसानों की मांगों पर आक्रामक हो गए। किसान प्रतिनिधियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद वे बैठक को बीच में ही छोड़कर चले गए। इस घटनाक्रम पर किसान संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे किसानों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया।

बैठक में भारतीय किसान संघ सहित विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने मंडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि तुलाई के नाम पर प्रति बोरी 200 से 300 ग्राम अतिरिक्त अनाज लिया जा रहा है, जो किसानों के साथ सीधा आर्थिक अन्याय है। इसके अलावा, हम्माली और तुलाई शुल्क के अतिरिक्त महिला कर्मचारियों के नाम पर प्रति बोरी 2 रुपए की अवैध वसूली किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

किसानों ने धर्मकांटे पर तुलाई की व्यवस्था लागू करने की मांग को जोरदार तरीके से रखा। उनका कहना था कि वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक कांटों पर तुलाई के कारण बंपर आवक के समय किसानों को 2 से 3 दिन तक मंडी में इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि उपज की बोली वाहनों पर ही लगाकर सीधे धर्मकांटे पर तुलाई करवाई जाए, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो सके।

मंडी अध्यक्ष के वॉकआउट के बाद भी बैठक जारी रही। मंडी सचिव, हमाल यूनियन और चढ़ारी यूनियन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्तावों पर विचार किया गया।

भारतीय किसान संघ द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में सुल्तानपुर कृषि उपज मंडी की बदहाली का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि स्टाफ की कमी के कारण टैक्स चोरी हो रही है और व्यापारियों द्वारा कच्ची पर्चियों के माध्यम से लेन-देन किया जा रहा है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही मंडी परिसर में साफ-सफाई, नालियों, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी पर भी नाराजगी जताई गई।

किसान संगठनों ने आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते धर्मकांटे पर तुलाई की व्यवस्था लागू नहीं की गई और समर्थन मूल्य केंद्रों पर छाया, पानी व प्रकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की गईं, तो प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!