Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 17 मार्च।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों के बीच ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को सामाजिक अंकेक्षण के दौरान कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं, जिन्होंने स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सामाजिक अंकेक्षण के तहत लोकपाल जगदीश शर्मा ग्राम पंचायत मंडाना पहुंचे, जहां निर्धारित ग्राम सभा का आयोजन होना था। हालांकि, मौके पर स्थिति बिल्कुल विपरीत रही—बैठक में एक भी ग्रामीण उपस्थित नहीं मिला। जांच में सामने आया कि ग्राम सभा की सूचना ग्रामीणों तक पहुंचाई ही नहीं गई थी, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई।
जांच के दौरान रिकॉर्ड संधारण में भी गंभीर लापरवाही उजागर हुई। सामाजिक अंकेक्षण रजिस्टर के खाली पन्नों पर पहले से अंगूठे के निशान लगे पाए गए। इसके अलावा “शानू शर्मा” नाम से एक ही व्यक्ति के अलग-अलग हस्ताक्षर दर्ज मिले, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो गई है।
रिकॉर्ड प्रबंधन में भारी लापरवाही
लोकपाल के निरीक्षण में यह भी सामने आया कि ग्राम पंचायत मंडाना में 10 अक्टूबर 2025 के बाद से कैशबुक का संधारण नहीं किया गया है। जॉब कार्ड रजिस्टर अनुपस्थित मिला, जबकि परिसंपत्ति रजिस्टर में भी कोई प्रविष्टि नहीं की जा रही थी। वृक्षारोपण कार्यों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई, जहां अधिकांश पौधे जीवित नहीं मिले।
इसी प्रकार ग्राम पंचायत मोरूकलां में भी मनरेगा से संबंधित कैशबुक अपडेट नहीं मिली। वर्ष 2020 के बाद से एक भी नया जॉब कार्ड जारी नहीं किया जाना भी प्रशासनिक निष्क्रियता को दर्शाता है।
वृक्षारोपण योजना पर सवाल
सार्वजनिक निर्माण विभाग सांगोद द्वारा दरा-कनवास, अरनिया और अकलेरा रोड पर 5.59 लाख रुपए की वृक्षारोपण योजना स्वीकृत की गई थी। रिकॉर्ड में व्यय दर्शाया गया, लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान एक भी जीवित पौधा नहीं पाया गया, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया पर असर
सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। इस प्रक्रिया में जिला एवं ग्राम स्तर के संसाधन व्यक्तियों द्वारा जांच कर आक्षेप ग्राम सभा में प्रस्तुत किए जाते हैं।
मंडाना में निर्धारित प्रक्रिया का पालन न होने से यह स्पष्ट हुआ कि जिम्मेदारों की लापरवाही से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
प्रशासन से जवाबदेही की मांग
उक्त घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सामाजिक अंकेक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में ही अनियमितताएं सामने आती हैं, तो योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
