LPG पर ‘अलर्ट मोड’: हर दिन 80 हजार टन गैस की खपत, 60% आयात निर्भरता—क्या रसोई पर मंडरा रहा संकट?

Written by : Sanjay kumar

नई दिल्ली, 18 मार्च 2026।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की रसोई गैस (LPG) आपूर्ति को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। देश में LPG की मांग लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिसके चलते सरकार, तेल कंपनियां और वितरण एजेंसियां मिलकर आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने में जुटी हैं।


भारत में रोजाना कितनी LPG खपत होती है?

ऊर्जा क्षेत्र के आधिकारिक अनुमानों और पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के नवीनतम रुझानों के अनुसार:

  • भारत की वार्षिक LPG खपत: लगभग 29–30 मिलियन मीट्रिक टन
  • मासिक खपत: लगभग 2.7–3.0 मिलियन मीट्रिक टन
  • दैनिक खपत: करीब 75,000 से 85,000 मीट्रिक टन

यानी देश में हर दिन करोड़ों परिवारों की रसोई इसी गैस पर निर्भर है।


घरेलू बनाम कमर्शियल खपत

भारत में LPG उपयोग का वितरण इस प्रकार है:

  • घरेलू (Domestic LPG): ~90%
  • कमर्शियल/औद्योगिक उपयोग: ~10%

घरेलू उपयोग में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जुड़े करोड़ों गरीब परिवार भी शामिल हैं, जिससे मांग में लगातार वृद्धि हुई है।


देश में कितने LPG कनेक्शन हैं?

तेल विपणन कंपनियों के संयुक्त आंकड़ों के अनुसार:

  • कुल LPG उपभोक्ता (Domestic Connections): 31 करोड़ से अधिक
  • उज्ज्वला योजना के लाभार्थी: ~9.6 करोड़
  • देश के लगभग हर घर तक LPG की पहुंच सुनिश्चित की जा चुकी है

कौन-कौन सी कंपनियां करती हैं सप्लाई?

भारत में LPG वितरण मुख्यतः तीन सरकारी तेल कंपनियों के माध्यम से होता है:

  1. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indane)
    • बाजार हिस्सेदारी: ~45%
  2. भारत पेट्रोलियम (Bharat Gas)
    • बाजार हिस्सेदारी: ~25%
  3. हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP Gas)
    • बाजार हिस्सेदारी: ~30%

ये तीनों कंपनियां मिलकर देशभर में 25,000 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के जरिए गैस की आपूर्ति करती हैं।


आयात बनाम घरेलू उत्पादन

भारत की LPG जरूरतें दो स्रोतों से पूरी होती हैं:

  • घरेलू उत्पादन: ~40–45%
  • आयात (Import): ~55–60%

आयात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) से आता है, जहां से सप्लाई समुद्री मार्गों के जरिए भारत पहुंचती है।


संकट की स्थिति क्यों बनती है?

वर्तमान परिस्थितियों में चिंता के मुख्य कारण:

  • खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता
  • वैश्विक शिपिंग रूट्स की अस्थिरता

इन कारणों से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।


सरकार के आपात कदम

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  • घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
  • रिफाइनरियों में अतिरिक्त प्रोसेसिंग
  • आयात स्रोतों का विविधीकरण
  • रणनीतिक स्टॉक (buffer stock) बढ़ाना
  • कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त निगरानी

आपूर्ति की वर्तमान स्थिति

ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार, देश में LPG की आपूर्ति फिलहाल स्थिर और नियंत्रित है। हालिया आयात खेपों और मजबूत लॉजिस्टिक्स के कारण किसी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनी है।


भारत की रसोई गैस प्रणाली दुनिया के सबसे बड़े और जटिल वितरण नेटवर्क में से एक है। वैश्विक तनाव के बावजूद सरकार और तेल कंपनियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि देश के 31 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक गैस की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।


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