Written by : Sanjay kumar
जयपुर, 2 मई: राजस्थान में आम लोगों द्वारा रोजमर्रा में उपयोग की जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की हालिया जांच में खांसी-जुकाम, गले के संक्रमण और बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 7 प्रमुख दवाइयां तय मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
सैंपलिंग प्रक्रिया और कार्रवाई
औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा 1 से 15 अप्रैल के बीच राज्य के विभिन्न स्थानों से इन दवाइयों के सैंपल एकत्र किए गए थे। हाल ही में प्राप्त जांच रिपोर्ट में इन सभी दवाइयों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित दवाइयों की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जांच में फेल हुई दवाइयां
🟥 लोरामिक्स सिरप (Cefixime Oral Suspension)
निर्माता: मैसर्स लार्क लेबोरेट्रीज (इंडिया) लिमिटेड, भिवाड़ी
उपयोग: बैक्टीरियल संक्रमण (गले, कान, श्वसन तंत्र) के इलाज में प्रयुक्त एंटीबायोटिक सिरप।
🟥 एल्बेंडाजोल टैबलेट
निर्माता: मैसर्स अफ्फी पेरेंटरल, हिमाचल प्रदेश
उपयोग: पेट के कीड़े (वर्म इंफेक्शन) खत्म करने के लिए दी जाने वाली प्रमुख दवा।
🟥 आईसटोकफ-एलएस ड्रॉप्स (Ambroxol + Levosalbutamol + Guaifenesin)
निर्माता: मैसर्स डिजिटल मिशन एवं मैसर्स अक्कोवैल फार्मा प्रा. लि.
उपयोग: खांसी, बलगम और सांस की तकलीफ में राहत देने के लिए इस्तेमाल।
🟥 मिथाइलप्रेड्निसोलोन-4 टैबलेट
निर्माता: मैसर्स यूनाइटेड बायोस्युटिकल्स प्रा. लि., हरिद्वार
उपयोग: सूजन, एलर्जी और गठिया जैसी बीमारियों के इलाज में उपयोग।
🟥 ओकुफ-डीएक्स (Dextromethorphan + Chlorpheniramine)
निर्माता: मैसर्स टक्सा लाइफसाइंसेज प्रा. लि., मोहाली
उपयोग: सूखी खांसी को नियंत्रित करने के लिए दी जाने वाली दवा।
🟥 एक्सटेंसिव-500 (Cefuroxime Axetil)
निर्माता: मैसर्स वीएडीएसपी फार्मास्युटिकल्स, हिमाचल प्रदेश
उपयोग: विभिन्न प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमणों में उपयोग होने वाली शक्तिशाली एंटीबायोटिक।
🟥 सिप्रोफ्लोक्सासिन 500 टैबलेट
निर्माता: मैसर्स ओमेगा फार्मा, हरिद्वार
उपयोग: गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक।
उपरोक्त सभी दवाइयां सामान्य से लेकर गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़े स्तर पर उपयोग की जाती हैं, ऐसे में इनका गुणवत्ता परीक्षण में असफल होना जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
सरकारी निगरानी प्रणाली पर उठे सवाल
इन दवाइयों का बड़े स्तर पर उपयोग होना और फिर भी गुणवत्ता जांच में असफल होना इस बात का संकेत है कि दवा निर्माण, सप्लाई और निगरानी प्रणाली में कहीं न कहीं बड़ी कमी मौजूद है। सवाल यह भी उठता है कि ये दवाइयां बाजार में पहुंचने से पहले गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया से कैसे गुजर गईं।
सैंपलिंग प्रक्रिया और कार्रवाई
औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा 1 से 15 अप्रैल के बीच राज्य के विभिन्न स्थानों से इन दवाइयों के सैंपल एकत्र किए गए थे। हाल ही में प्राप्त जांच रिपोर्ट में इन सभी दवाइयों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित दवाइयों की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जनस्वास्थ्य पर संभावित खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी दवाइयों का उपयोग न केवल मरीजों के इलाज को प्रभावित कर सकता है, बल्कि स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव भी डाल सकता है। खासकर एंटीबायोटिक दवाइयों के गुणवत्ता में कमी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी बड़ी समस्या को जन्म दे सकती है, जो भविष्य में इलाज को और जटिल बना सकती है।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह आवश्यकता उजागर कर दी है कि दवा निर्माण कंपनियों के साथ-साथ सरकारी निगरानी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बिक्री पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत करना बेहद जरूरी है।
