Written by : Sanjay kumar
कोटा, 2 मई 2026।
पितृ दोष निवारण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं श्री रामलला अयोध्या जी सेवा समिति, अयोध्या धाम के अध्यक्ष डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री का नाम हाल ही में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होने पर कोटा में भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह गरिमामयी कार्यक्रम गौतम समाज द्वारा दादाबाड़ी स्थित गौतम वाटिका में आयोजित हुआ, जहां समाजबंधुओं ने साफा बांधकर, माल्यार्पण कर एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में भाजपा देहात महामंत्री विशाल शर्मा, गौतम समाज दादाबाड़ी के संरक्षक जगमोहन गौतम, वरिष्ठ समाजसेवी राजेन्द्र गौतम, गौतम आश्रम तालेड़ा के प्रवक्ता अनिल गौतम, अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा सहित प्रवीण पंचोली, रवि गौतम, रमेश गौतम, श्याम बिहारी गौतम एवं अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
🔶 रामयंत्र की दिव्यता पर विशेष प्रकाश
पत्रकारों से संवाद करते हुए डॉ. शास्त्री ने श्री रामलला के रामयंत्र की दिव्यता एवं प्रभाव का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह यंत्र रामरक्षा स्त्रोत से अभिमंत्रित होता है और इसे रामरक्षा यंत्र भी कहा जाता है। इसमें हनुमान जी कीलक के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं तथा सीता-राम इसके प्रमुख देवता माने जाते हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि आठ पंखुड़ियों से युक्त इस यंत्र में कुबेर जी का विशेष स्थान होता है, जो घर-परिवार और व्यापार में सुख-समृद्धि प्रदान करता है। साथ ही इसमें अष्टदिशाओं का निर्माण होने से जहां भी यह यंत्र स्थापित किया जाता है, वहां के वास्तुदोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
🔶 राम मंदिर निर्माण में यंत्र की महत्ता
डॉ. शास्त्री ने कहा कि राम मंदिर निर्माण में इस यंत्र की शक्ति स्पष्ट रूप से देखने को मिली है। अनेक बाधाओं के बावजूद मंदिर निर्माण का निर्विघ्न पूर्ण होना इसकी दिव्यता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि देश की राष्ट्रपति द्वारा भी अयोध्या पहुंचकर इस यंत्र का पूजन किया गया और इसे मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज के सानिध्य में इस यंत्र का देशभर में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है तथा शीघ्र ही राजस्थानवासियों को यह यंत्र घर बैठे उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
🔶 युवाओं को सनातन से जुड़ने का आह्वान
अपने संबोधन में डॉ. शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म शाश्वत है, जिसका न आदि है और न अंत। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शास्त्रों का अध्ययन करें, अपने मंत्रों को जागृत करें और अपनी संस्कृति से जुड़कर आने वाली पीढ़ी में धर्म के प्रति आस्था और ज्ञान का विस्तार करें।
🔶 यूजीसी कानून पर स्पष्ट राय
यूजीसी कानून को लेकर डॉ. शास्त्री ने स्पष्ट और तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसा कोई भी कानून नहीं होना चाहिए, जो समाज में विभाजन या असंतुलन उत्पन्न करे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना, ज्ञान का प्रसार करना और सभी को समान अवसर प्रदान करना है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा से जुड़े निर्णय पारदर्शिता, व्यापक संवाद और सभी वर्गों की सहभागिता के साथ होने चाहिए, ताकि देश की एकता और अखंडता मजबूत बनी रहे।
समापन
इस सम्मान समारोह ने न केवल डॉ. राजानन्द शास्त्री की उपलब्धियों को गौरवान्वित किया, बल्कि कोटा शहर के लिए भी यह गर्व का विषय बना। कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें बधाई दी।
