Written by : प्रमुख संवाद
कोटा, 27 फरवरी। भारत विकास परिषद के आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय पांचवीं अखिल भारतीय सुसंस्कारित स्वास्थ्य सेवा–2026 कार्यशाला का शुभारंभ सुभाष नगर स्थित पोरवाल भवन में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैयाजी जोशी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में भैयाजी जोशी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज-परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। समाज की पीड़ा को अपना मानकर निस्वार्थ भाव से सेवा करना ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने कहा कि संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं का दृष्टिकोण सदैव समाज-केंद्रित होना चाहिए और सफलता-विफलता से ऊपर उठकर प्रतिबद्धता, निरंतरता, सतत प्रयास और विश्वसनीयता के साथ कार्य करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज और व्यक्ति अलग नहीं हैं। समाज की चुनौतियों का समाधान संस्कारित व्यक्तियों के माध्यम से ही संभव है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों एवं स्वयंसेवकों को मानवता, संवेदना और नैतिकता को सर्वोपरि रखते हुए सेवा-कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम में विचार रखते हुए डॉ. पूर्णेन्दु सक्सैना ने कहा कि “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” केवल नारा नहीं, बल्कि आचरण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज के व्यावसायिक चिकित्सा वातावरण में नैतिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है, किंतु सेवा-बस्तियों और समाज से आत्मीय जुड़ाव चिकित्सकों में सेवा का वास्तविक आनंद उत्पन्न करता है। जब मरीज को केवल ‘केस’ नहीं, बल्कि अपना मानकर उपचार किया जाता है, तब चिकित्सा सेवा का स्वरूप सुसंस्कारित बनता है।
वक्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य केवल डॉक्टरों का विषय नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। छोटे स्वास्थ्य शिविरों से लेकर अस्पताल, क्लिनिक और ब्लड बैंक जैसे प्रकल्पों तक सामाजिक सहभागिता आवश्यक है। सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित स्वास्थ्य संस्थान आत्मीय और नैतिक वातावरण प्रदान कर सकते हैं, जिससे समाज आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ता है।
भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता एवं महामंत्री अशोक वाशिष्ठ ने बताया कि कार्यशाला में देशभर से आए चिकित्सकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में विभिन्न पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। संचालन डॉ. सचिन जाम्भोरकर ने किया।
