Written by : Sanjay kumar
कोटा (राजस्थान), 1 मार्च 2026:
दादाबाड़ी स्थित गौतम वाटिका में आयोजित बैठक के दौरान डॉ आचार्य राजानंद शास्त्री, अध्यक्ष – श्री राम लला अयोध्या सेवा समिति, अयोध्या, ने आने वाले महर्षि गौतम प्राकट्य महोत्सव 2026 के पोस्टर का विमोचन करते हुए कहा कि सनातन धर्म का मूल संदेश सद्भाव, सह-अस्तित्व और आध्यात्मिकता है, और इसे राजनीतिक विवादों में घसीटने का प्रयास करना अनुचित है।
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परोपकार, मानवता और धर्मनिरपेक्ष सह-अस्तित्व के संदेश को आत्मसात्करते हुए राजानंद शास्त्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सनातन धर्म में किसी भी प्रकार का विवाद मूलतः नहीं है, बल्कि उसे राजनीतिक दृष्टिकोण से विवादित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन और अन्य धर्म सदियों से शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहे हैं और आज भी आस्था, अध्यात्म और संस्कृति के आधार पर समाज को आगे बढ़ाने का संदेश देते हैं।
इतिहास का संदर्भ देते हुए आचार्य ने कहा कि किसी भी युग में धर्म का प्रयोग हत्या, हिंसा या विभाजन के लिए नहीं किया गया, बल्कि हर धर्म का मूल उद्देश्य समाज में भाईचारा, शांति और नैतिकता का प्रसार रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में संकटों और संघर्षों के समय भी समाज ने अध्यात्म और संयम को चुना है।
वक्फ बोर्ड के मुद्दे पर बोलते हुए राजानंद शास्त्री ने कहा कि “वक्फ बोर्ड के नाम पर विवादित जमीनों के आवंटन और उपयोग को लेकर एक खुली, पारदर्शी बहस होनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने लाया जा सके।” उन्होंने यह भी कहा कि समाज के हर वर्ग द्वारा टैक्स भरा जाता है और उसका उचित लाभ सभी समुदायों तक पहुंचना चाहिए।
राजानंद शास्त्री ने यह स्पष्ट किया कि सनातन धर्म की कोई अलग राजनीतिक पार्टी नहीं है, फिर भी सनातनी विचारधारा से प्रेरित लोग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण सनातन धर्म के प्रति गलत धारणाएँ फैलती हैं, जिन्हें दूर करना आवश्यक है।
उन्होंने श्री राम मंदिर के प्रभु श्रीराम लला के अयोध्या में विराजमान होने की बात को याद करते हुए कहा कि देश और समाज में सामंजस्य, भाईचारा तथा अध्यात्मिक चेतना को और व्यापक रूप से बढ़ावा देना चाहिए।
शंकराचार्य विवाद पर बोलते हुए राजानंद शास्त्री ने कहा कि जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, किसी पर दोष सिद्ध नहीं माना जाना चाहिए। आरोप लगना और दोष सिद्ध होना दो अलग बातें हैं, और यह निर्णय न्यायालय का है।
इस अवसर पर कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुंजबिहारी गौतम, गौतम वाटिका अध्यक्ष श्याम बिहारी शर्मा, महामंत्री रमेशचंद शर्मा, समाज के प्रबुद्धजन सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
📌 मुख्य बातें —
- सनातन धर्म में विवाद का स्थान नहीं, यह सहअस्तित्व और आध्यात्मिकता का प्रतिनिधि है।
- सनातन धर्म को राजनीतिक रूप से रंगने के प्रयास समाज में विभाजन पैदा करते हैं।
- वक्फ बोर्ड और भूमि विवादों पर खुली सार्वजनिक बहस आवश्यक।
- निष्कर्ष निकालने से पहले न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी।
- प्रभु श्रीराम के अयोध्या में विराजमान होना समाज में समरसता का संकेत है।

