गैस संकट की दस्तक: सिलेंडर किल्लत से स्कूलों का पोषाहार, छात्रों की मेस और रेस्टोरेंट प्रभावित, कालाबाजारी पर सरकार सख्त

Written by : Sanjay kumar

जयपुर, 11 मार्च 2026।

राजस्थान में रसोई गैस और कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कथित किल्लत को लेकर इन दिनों व्यापक हलचल देखी जा रही है। राज्य के कई शहरों—जयपुर, कोटा, अलवर, सीकर और टोंक—से गैस सिलेंडरों की कमी, सप्लाई बाधित होने और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने आम उपभोक्ताओं से लेकर होटल, रेस्टोरेंट, छात्रावास और सरकारी स्कूलों तक की व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ स्थानों पर घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कई जगहों पर सिलेंडर की कीमतें निर्धारित दर से कहीं अधिक वसूली जा रही हैं। कई रेस्टोरेंट संचालकों का आरोप है कि कॉमर्शियल सिलेंडर, जिसकी सामान्य कीमत लगभग 1100–1200 रुपये के आसपास होती है, उसे 2000 से 2500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इससे खाद्य व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है और आने वाले दिनों में होटल और ढाबों में भोजन की कीमतों में वृद्धि की आशंका भी जताई जा रही है।

टोंक जिले में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां एक गैस एजेंसी द्वारा सरकारी स्कूलों के पोषाहार (मिड-डे मील) कार्यक्रम के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रोक देने का मामला सामने आया है। इससे हजारों विद्यार्थियों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो गया। प्रशासन वैकल्पिक एजेंसियों के माध्यम से सप्लाई बहाल कराने का प्रयास कर रहा है ताकि बच्चों के पोषण कार्यक्रम पर असर न पड़े।

इसी प्रकार अलवर में एक गैस एजेंसी के बाहर उपभोक्ताओं का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब घरेलू सिलेंडर देने से मना कर दिया गया। आक्रोशित भीड़ ने एजेंसी पर कालाबाजारी के आरोप लगाए, जिसके चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और एजेंसी संचालक को खुद को कार्यालय के भीतर बंद करना पड़ा। वहीं राजधानी जयपुर के कुछ इलाकों में कॉमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में अचानक भारी उछाल देखने को मिला, जिससे छोटे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों में असंतोष बढ़ गया है।

कोचिंग हब माने जाने वाले कोटा में भी गैस संकट का असर सीधे छात्रों पर पड़ रहा है। कई हॉस्टल और मैस संचालकों ने सिलेंडर की अनुपलब्धता के कारण भोजन व्यवस्था अस्थायी रूप से बंद कर दी। इससे बाहर से पढ़ने आए हजारों विद्यार्थियों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात बेहतर नहीं हैं—सीकर जिले के कुछ गांवों में चार दिन से गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं।

इन परिस्थितियों के बीच राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रदेश में गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी भी प्रकार की वास्तविक कमी नहीं है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने तेल कंपनियों और जिला रसद अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। शासन सचिव अम्बरीष कुमार ने बताया कि प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और लोगों को किसी भी प्रकार की घबराहट में आकर अनावश्यक बुकिंग करने की आवश्यकता नहीं है।

सरकार ने जिला रसद अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गैस एजेंसियों के स्टॉक की नियमित जांच करें और यदि कहीं कृत्रिम कमी पैदा कर अवैध वसूली या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है। आवश्यक सेवाओं—जैसे अस्पताल, छात्रावास, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी योजनाओं से जुड़े भोजन कार्यक्रम—को प्राथमिकता देने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।

इस बीच वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को भी इस स्थिति से जोड़ा जा रहा है। विशेष रूप से मिडिल ईस्ट क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान तथा इजराइल के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। हालांकि तेल कंपनियों—Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum—ने राज्य सरकार को भरोसा दिलाया है कि राजस्थान के लिए निर्धारित गैस कोटे में फिलहाल कोई कटौती नहीं की गई है और सप्लाई चेन को डिजिटल सिस्टम के माध्यम से लगातार मॉनिटर किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति का बड़ा कारण वास्तविक कमी से अधिक सप्लाई चेन में व्यवधान, परिवहन संबंधी चुनौतियां और कुछ स्तरों पर जमाखोरी या कालाबाजारी हो सकता है। यदि प्रशासनिक निगरानी कड़ी की जाती है और वितरण प्रणाली पारदर्शी बनाई जाती है, तो स्थिति जल्द ही सामान्य हो सकती है।

फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई और अनिश्चितता है। गैस सिलेंडर की कीमतों में संभावित वृद्धि का सीधा असर घरों की रसोई, छात्रों के भोजन और होटल उद्योग पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार, गैस कंपनियों और प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर समन्वय ही इस संकट को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।

यदि समय रहते सप्लाई व्यवस्था को स्थिर कर दिया जाता है और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई होती है, तो न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी बल्कि राज्य की शिक्षा, पोषण और खाद्य सेवाओं की व्यवस्था भी सुचारु रूप से चलती रहेगी।

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