Written by : Sanjay kumar
Date : 12 मार्च 2026
बिहार के रोहतास जिले से भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र और ऑनलाइन आवेदन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिविल कोर्ट में चपरासी पद की भर्ती के लिए जारी किए गए एक अभ्यर्थी के एडमिट कार्ड में उसकी तस्वीर की जगह कुत्ते की तस्वीर छप जाने से अभ्यर्थी के साथ-साथ आम लोगों में भी आश्चर्य और नाराज़गी देखने को मिल रही है।
जानकारी के अनुसार रोहतास जिले के बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के धवा गांव निवासी रितेश कुमार ने वर्ष 2022 में सिविल कोर्ट में चपरासी पद के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2026 में इस भर्ती प्रक्रिया की लिखित परीक्षा की तिथि घोषित की गई और अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी किए गए। लेकिन जब रितेश कुमार ने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो वह हैरान रह गए। उनके एडमिट कार्ड में नाम, पिता का नाम और अन्य विवरण तो सही थे, लेकिन फोटो की जगह पर उनकी तस्वीर के स्थान पर कुत्ते की तस्वीर लगी हुई थी।
रितेश कुमार के अनुसार उन्होंने पहले इसे तकनीकी त्रुटि समझकर दोबारा एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, लेकिन हर बार वही तस्वीर दिखाई दी। इस विचित्र गलती को देखकर वह पूरी तरह स्तब्ध रह गए। उनका कहना है कि चार साल पहले बड़ी उम्मीद के साथ आवेदन किया था, लेकिन अब परीक्षा से ठीक पहले इस प्रकार की गंभीर त्रुटि सामने आने से उनकी चिंता बढ़ गई है। उन्होंने तुरंत संबंधित भर्ती प्राधिकरण और विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में शिकायत भेजकर जल्द से जल्द संशोधित एडमिट कार्ड जारी करने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि इस भर्ती परीक्षा का आयोजन 15 मार्च को निर्धारित किया गया है और रितेश कुमार का परीक्षा केंद्र सहरसा जिले में बनाया गया है। ऐसे में यदि समय रहते यह त्रुटि ठीक नहीं की गई तो परीक्षा केंद्र पर उन्हें पहचान सत्यापन में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की गलती आमतौर पर ऑनलाइन आवेदन पोर्टल में डेटा अपलोडिंग या सर्वर आधारित इमेज मैपिंग की त्रुटि के कारण सामने आती है। कई बार आवेदन प्रक्रिया के दौरान गलत फाइल अपलोड हो जाने या डेटाबेस में इमेज लिंकिंग की तकनीकी खामी के कारण भी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।
बिहार में सरकारी दस्तावेजों में अजीबोगरीब त्रुटियों के मामले पहले भी चर्चा में रहे हैं। पूर्व में कई जिलों में जारी जाति, आय और निवास प्रमाण-पत्रों में गलत तस्वीरें लगने के मामले सामने आए थे। कुछ मामलों में तो प्रमाण-पत्रों में व्यक्ति की जगह जानवरों या फिल्मी कलाकारों की तस्वीर तक दिखाई देने की शिकायतें दर्ज हुई थीं। इसी तरह विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के एडमिट कार्ड में भी गलत फोटो, नाम या जन्मतिथि दर्ज होने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली लागू करने का उद्देश्य प्रक्रियाओं को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना था, लेकिन यदि समय-समय पर तकनीकी परीक्षण और सत्यापन नहीं किया जाए तो ऐसी चूकें उम्मीदवारों के लिए गंभीर समस्या बन सकती हैं। इसलिए भर्ती एजेंसियों को आवेदन से लेकर एडमिट कार्ड जारी करने तक हर चरण में तकनीकी और मानवीय सत्यापन की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
फिलहाल रितेश कुमार को उम्मीद है कि परीक्षा से पहले उनकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा और उन्हें संशोधित एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा, ताकि वह बिना किसी बाधा के परीक्षा में शामिल हो सकें। वहीं यह घटना भर्ती प्रक्रिया में तकनीकी प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता की ओर स्पष्ट संकेत देती है।
